कोटा में वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय का 18वां दीक्षांत समारोह गुरुवार को आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने की। इस दौरान स्टूडेंटस और मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ डिग्री का मिलना ही सही शिक्षा मिलना नहीं है। उन्होंने कहा कि आज यहां मौजूद बच्चों को डिग्री दी गई है जो मौजूद नहीं है उनके घर डिग्री पहुंच जाएगी। इस दौरान उन्होंने मंच पर मौजूद यूनिवर्सिटी कुलगुरू और स्टाफ से पूछा कि पास वाले तो यहां बैठे हैं, हजारों बच्चों को डिग्री मिली है, फैल कितने हुए है। इस पर जवाब मिला कि कोई बच्चा फैल नहीं है। इस पर उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने कुलगुरूओं की मीटिंग ली थी। इसमें कई जगह से यह बात सामने आई कि प्रदेश में कई कॉलेज ऐसे हैं जहां संसाधन नहीं है, एक एक कमरे में चल रहे है। वहां पढ़ रहे बच्चों को भी पास कर देते है। अगर ऐसे हालात कॉलेजों में है तो वहां बच्चों की क्या पढ़ाई हुई होगी। ऐसी पढ़ाई और डिग्री से क्या होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक का काम है रोज अपने ज्ञान में बढ़ोत्तरी करें और स्टूडेंटस का ज्ञान बढ़ाए। राज्यपाल ने कहा कि सिलेबस के साथ सब्जेक्ट से जुडी बाहर की किताबें भी पढ़नी चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा ज्ञान हासिल हो सके। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के बाद मां बाप के साथ, समाज के साथ और गरीब तबके की सेवा के साथ आगे बढ़ना ही असली शिक्षा है। ईमानदारी, कर्तव्य हो धर्म- उप मुख्यमंत्री
समारोह के विशिष्ट अतिथि उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा ने दीक्षा प्राप्त विद्यार्थियों को विकसित भारत की नींव के मजबूत स्तंभ बताया। उन्होंने आह्वान किया कि वे जिस भी क्षेत्र में जाएं ईमानदारी को अपना आभूषण, कर्तव्य को अपना धर्म और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 एक शिक्षा के नए युग का आरंभ है सिर्फ पाठ्यक्रम और डिग्री तक सीमित नहीं बल्कि चारित्रिक विकास और क्षमता वर्धन पर केंद्रित है। इसी नीति का अनुसरण करते हुए वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय भी नियमित शिक्षा से वंचित रहे विद्यार्थियों के सपनों की उड़ान बन रहा है। उप मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के विकास एवं महिला शिक्षा के विस्तार की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा के विस्तार से प्रदेश के युवा ज्ञान एवं कौशल दक्ष होकर जिम्मेदार नागरिक, समाज के मार्गदर्शक और भविष्य के निर्माता बन सकेंगे। दिसंबर 2023 से दिसंबर 2024 की 75,925 डिग्री दी गई
कुलगुरू प्रोफेसर बीएल वर्मा ने बताया कि समारोह में दिसंबर 2023 और जून 2024 व दिसंबर 2024 की परीक्षाओं की उपाधियों के अलावा तीन पीएचडी की उपाधियां भी प्रदान की गई। इनमें दिसंबर 2023 की कुल 24,619, जून 2024 की 26,932 तथा दिसंबर 2024 की 24,371 उपाधियां शामिल हैं। तीनों परीक्षाओं को मिलाकर कुल 75,925 उपाधियों का वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि सभी उपाधियों में सुरक्षा के फीचर्स भी समाहित किए गए हैं जिससे उनका कोई भी दुरूपयोग न कर सके। स्टूडेंट्स को पहले ही दिए मैडल
वहीं कार्यक्रम में आए स्टूडेंट्स को पहले ही मैडल और उनकी डिग्री दे दी गई। गोल्ड मैडल हासिल करने वाले स्टूडेंट्स को पहले से ही गोल्ड मैडल दे दिए गए थे जिन्हें पहनकर वे कार्यक्रम में मौजूद रहे। बाद में स्टूडेंट्स को मंच पर बुलाया गया और राज्यपाल के साथ फोटो खिंचवाया गया। इस दौरान स्टूडेंट्स का कहना था कि परंपरा यह रही है कि कुलाधिपति के हाथों से मैडल दिए जाते है। लेकिन इस बार पहले से ही मैडल दे दिए गए थे।


