जमशेदपुर के पटमदा स्थित जोड़सा पंचायत कभी नक्सलियों का गढ़ हुआ करती थी। पटमदा थाना क्षेत्र के झुंझका गांव निवासी सचिन उर्फ राम प्रसाद मांडी अपने दस्ते के साथ दिन में ही एके-47 लेकर इलाके में भ्रमण करता था। संगठन में एरिया कमांडर का पदभार मिला हुआ था। ग्रामीण भी डर से उसके खिलाफ आवाज नहीं उठा पाते थे। एक गांव से दूसरे गांव तक आने-जाने के लिए सड़कें नहीं थीं। नेटवर्क के अभाव में मोबाइल से बातचीत भी नहीं हो पाती थी। एरिया कमांडर सचिन अपने ही गांव में सड़क नहीं बनने देता था। वर्ष 2007 में सचिन ने अपने सहयोगी राहुल उर्फ रंजीत पाल के साथ मिलकर बाघुड़िया गांव में सांसद सुनील महतो की हत्या कर दी। इसके बाद सचिन का खौफ काफी ज्यादा बढ़ गया। हालांकि इसके कुछ वर्ष बाद ही पुलिस की दबिश बढ़ी तो रंजीत ने बंगाल में सरेंडर कर दिया। इनामी नक्सली के सरेंडर के बाद इलाका खुशहाल चाईबासा का हड़ियान, कुड़ियान आैर जियान गांव घोर नक्सल प्रभावित इलाका था। 25 लाख का इनामी नक्सली कान्हू मुंडा जियान गांव का ही रहने वाला था। रोज अलग-अलग राज्य की पुलिस गिरफ्तार करने के लिए पहुंचती थी। दिन में भी जियान गांव में पुलिस की घेराबंदी रहती थी। तत्कालीन एसडीपीआे अजीत कुमार बिमल ने कान्हू मुंडा की बेटी की मदद से उसे सरेंडर कराया। इसके बाद ग्रामीण निडर होकर खेतीबारी करने लगे। अब पूरा इलाका खुशहाल है। ग्रामीणों का विरोध देख सचिन ने इलाका ही छोड़ दिया, तब विकास के काम हुए इधर जोड़सा इलाके के ग्रामीण भी एकजुट हो गए आैर सचिन की गतिविधि की जानकारी पुलिस को देना शुरू कर दिया। जब भी वह अपने गांव में पहुंचता, गुप्त रूप से पुलिस को जानकारी दे दी जाती। सचिन भी स्थिति को भांप गया। वर्ष 2015 के बाद वह अपने गांव तो क्या, इलाका ही छोड़कर फरार हो गया। अब ग्रामीण बेखौफ होकर अपना काम करते हैं। गांव में सड़कें भी बन गई हैं आैर मोबाइल से बातचीत करने के लिए नेटवर्क भी है। बंगाल में आका ने किया सरेंडर तो इलाका छोड़ भागा सचिन उर्फ राम प्रसाद मांडी इलाके के एक गांव में बनी सड़क। जियान गांव में नक्सली कान्हू मुंडा का घर।


