प्रदेश में पाकिस्तान से लगते चार जिलों के 184 सीमावर्ती गांव पूरी तरह साधन-सुविधाओं से संपन्न होंगे। इसके लिए चार साल का एक्शन प्लान बनाकर काम किया जाएगा। इसके लिए केन्द्र सरकार से बजट मिलेगा। प्रदेश के चार जिलों बीकानेर, श्रीगंगानगर, जैसलमेर और बाड़मेर की सीमाएं पाकिस्तान से लगती हैं। इन जिलों के गांव-ढाणियों में रहने वाले लोगों की बिजली-पानी, सड़कों सहित अनेक परेशानियां अब दूर हो जाएंगी। ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य केन्द्र होगा, स्कूलों की बिल्डिंग दुरुस्त होगी और बच्चों के खेलने के लिए मैदान होंगे। ग्रामीणों की कनेक्टिविटी सुधर जाएगी। बॉर्डर पर्यटन के भी काम होंगे। इसके लिए चार साल का एक्शन प्लान बनेगा। जिला परिषद को प्लान बनाने का जिम्मा सौंपा गया है। अन्य योजनाओं में जो काम नहीं हो सकते, उन्हें केन्द्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में लेकर कराया जाएगा। बीकानेर जिले की खाजूवाला और बज्जू तहसीलों के 46 गांवों सहित श्रीगंगानगर के 68, बाड़मेर के 36 और जैसलमेर के 34 गांवों को चिह्नत किया गया है। पूरे देश के सीमाई राज्यों के लिए केन्द्र सरकार ने 6839 करोड़ रुपए का बजट तय किया है, जिसे वर्ष-28-29 तक लागू किया जाएगा। प्रत्येक गांव पर 3 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने योजना के पहला चरण वर्ष-23 में शुरू किया था। अब दूसरे चरण में काम के लिए गांवों को चिह्नित किया गया है। बीकानेर के ये गांव किए चिह्नित खाजूवाला : 1 एएलएम, 40 केवाईडी, 31 केवाईडी, 33केजेडी, 20 बीडी, आनंदगढ़, 12 केवाईडी, 17 केवाईडी, 28 बीडीए, 2 केडब्ल्यूएमए, 19 बीडी, 16 बीडी, 22 केवाईडी, 5केजेडी, 13 केवाईडीए, 24-25 केवाईडी, 2 केएलडी, 1 केजेडी, 3पीडब्ल्यूआईएन, 28 केवाईडी, 34 केवाईडी, 5 केवाईडीए, 4 केवाईडी, 1 पीएचएम, 3 केवाईडीए, 2 बीआरडब्ल्यूएम, 7 पीएचएमए, 6 पीएचएमए, 8 केवाईडीए, 39केजेडी, 4 बीजीएमए, 2 जीडब्ल्यूएम, 28 केजेडी, 3 वीजीएमए, बल्लर बारानी, 10 बीडीए बज्जू खालसा – फतुवाला, सांचू, भूरासर, अक्खूसर, राववाला, अनेवाला, 7एएम फर्स्ट, कब्रेवाला, कायमवाला मुख्य फोकस कनेक्टिविटी – हर मौसम के अनुकूल सड़क और दूरसंचार कनेक्टिविटी। बुनियादी ढांचा- बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल। आजीविका- पर्यटन, कृषि, कौशल विकास और “एक गांव एक उत्पाद” के माध्यम से आर्थिक विकास। केन्द्र सरकार की योजना में शामिल है कि पाकिस्तान से लगते गांव, चक-ढाणी में रहने वाले लोग बीएसएफ की आंख, नाक, कान बनें। इसके लिए उनके इलाकों को साधन-सुविधा संपन्न बनाने की योजना है। बीएसएफ की चौकियों को तो बेहतर बनाया ही जाएगा, इंटेलीजेंस और पुलिस की अनेक चौकियां हैं जो बंद पड़ी हैं। या उनमें स्टाफ और सुविधाओं की कमी है। उन्हें चाक-चौबंद किया जाएगा। इससे खाजूवाला और बज्जू के सीमाई क्षेत्रों में अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पार से की जाने वाली अवांछित गतिविधियों और इलाकों में आने वाले संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जा सकेगी।


