पठानकोट | एक राष्ट्र एक चुनाव बिल पर लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है, पर हम देशवासियों का जानना बेहद जरूरी है कि देश की आजादी और संविधान बनने के बाद एक राष्ट्र एक चुनाव सबसे पहले 1952 में हुआ, जो तकरीबन करीब 1967 तक चले। यह बात एडवोकेट तुषार मन्हास ने कही। इसमें भारत ने इस तरह से वोट डाले पर 1967 के बाद उस वक्त की कोई समस्या रही होगी, जो ये पैटर्न आगे नहीं चल पाया, लेकिन हम आज के भारत को पिछले वक्त के भारत साथ नहीं मिला सकते। संसद में एक राष्ट्र एक चुनाव बिल न पास होने की वजह से संयुक्त संसदीय समिति का गठन हुआ है। इसके 31 सदस्य सांसद हैं, इसमें संयुक्त संसदीय समिति का मुख्य उद्देश्य विभिन्न हितधारक, जैसे सेवानिवृत्त न्यायाधीश, वकील, चुनाव आयोग के पूर्व सदस्य, संवैधानिक विशेषज्ञ और सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक इनपुट इन सभी व्यक्तित्वों से राय लेना और बिल में इसका विशेष तौर पर प्रयोग करना। ताकि संसद में बिल और मजबूती से पेश हो।


