राजधानी की ऐतिहासिक धरोहर और वाटर रिचार्ज सिस्टम को बनाए रखने वाले बूढ़ातालाब तालाब को छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने एक प्राइवेट कंपनी को सौंप दिया है। अब यहां फिर चौपाटी खोली जाएगी। ये वही कंपनी है जिसे 2018 में बूढ़ातालाब का यही हिस्सा 12 करोड़ में पंद्रह साल के ठेके पर दिया गया था। उस समय सत्ता बदल गई और ठेका निरस्त कर दिया गया था। अब 30 करोड़ से सजा संवरा बूढ़ातालाब कंपनी को सौंपा जा रहा है।
कंपनी ने तालाब के भीतर बनाए गए पाथवे को पूरी तरह खत्म कर दिया। यहां पर लोहे के बड़े-बड़े स्ट्रक्चर खड़े कर दिए हैं। इसमें खाने-पीने की दुकानें लगेंगी। इन दुकानों के ऊपर भी बैठने की व्यवस्था भी रहेगी। तालाब के इसी हिस्से से सटी दानी स्कूल और डिग्री गर्ल्स कालेज है। स्कूल और कॉलेज के काफी हिस्से को तालाब किनारे बैठकर देखा जा सकता है। पर्यटन मंडल ने इस हिस्से को ठेके पर देते हुए बच्चों की सुरक्षा, निजता और ऐतिहासिक तालाब को भी दांव पर लगा दिया है। आसपास रहने वालों के अलावा आम शहरवासियों ने तालाब के इस व्यावसायीकरण का विरोध शुरू कर दिया है। फिर भी प्रशासन सुनने को तैयार नहीं। 2018 में विरोध के कारण रुकवाना पड़ा था काम 2018 में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने बूढ़ातालाब को 15 साल के लिए एमएमपी वॉटर स्पोर्टिंग कंपनी को ठेके पर दे दिया था। अनुबंध में कंपनी को तालाब के सौंदर्याकरण इत्यादि पर 12 करोड़ खर्च करना था। शर्त के अनुसार कंपनी को नीलाभ उद्यान के साथ-साथ दानी गर्ल्स स्कूल की तरफ सड़क पर चौपाटी बनाकर कारोबार करना था। कंपनी ने काम शुरू किया तो लोगों को मंसूबा भी समझ में आया या और तब विरोध शुरू हुआ। मामला एनजीटी तक पहुंचा। जनहित याचिका भी लगी। मजबूरन पर्यटन मंडल को काम रुकवाना पड़ा। फिर सरकार बदल गई। स्मार्ट सिटी से तालाब में करीब 30 करोड़ की लागत से सौंदर्याकरण हुआ। अब फिर से सत्ता बदल गई और भाजपा के आते ही पर्यटन मंडल ने उसी कंपनी को चौपाटी बनाने अनुमति दे दी। बूढ़ातालाब में चौपाटी के लिए तालाब का पाथवे खत्म करने, स्कूल परिसर के पास चौपाटी तथा कंपनी के साथ अनुबंध में शराब की अनुमति की शिकायत के बाद महापौर मीनल चौबे मंगलवार को बूढ़ातालाब पहुंचीं। उनके साथ निगम कमिश्नर विश्वदीप भी पहुंचे। ठेका लेने वाली कंपनी ने विभाग के अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक कर मनमानी की है। यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि शहर की बेटियां स्कूल-कालेज में पढ़ने जाती है, वहां का माहौल खराब हो। कंपनी के साथ हुए अनुबंध में शराब के लिए अनुमति की शिकायत है। यदि ऐसा है तो यह शहर और आम लोगों की भावना के साथ बड़ा खिलवाड़ है। हम किसी भी कीमत ऐसा नहीं होने देंगे।
-मीनल चौबे, मेयर अब नालंदा-2 के नाम पर साइंस कॉलेज चौपाटी तोड़ने की तैयारी, ड्राइंग डिजाइन भी बन गया जीई रोड में साइंस कालेज चौपाटी को उजाड़कर वहां एक बड़ी और भव्य लाइब्रेरी बनाने की तैयारी की जा रही है। इसे नालंदा-2 कहा जाएगा। इसके लिए नगर निगम ने ड्राइंग-डिजाइन तैयार कर लिया है। जल्द ही इसका प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
शासन से स्वीकृति मिलने के बाद निगम लाइब्रेरी बनाने के लिए टेंडर इत्यादि की प्रक्रिया शुरू करेगा। मंगलवार को रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने योजना का प्रजेंटेशन देखकर सहमति दे दी है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक राजेश मूणत साइंस कॉलेज के सामने बनी चौपाटी का शुरू से विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है इससे छात्रों को पढ़ाई का माहौल नहीं मिल रहा है। ये व्यवसायिक परिसर में बदल गया है। कांग्रेस शासन काल में उन्होंने यहां धरना देकर विरोध किया। बाद में कोर्ट से स्टे मिल जाने के कारण चौपाटी को हटाया नहीं जा सका। नालंदा परिसर का जबरदस्त क्रेज
संस्कृत कालेज के पास बने नालंदा परिसर का छात्रों के बीच जबर्दस्त क्रेज है। यह राज्य की पहली 24 घंटे खुली रहने वाली लाइब्रेरी है। यहां पंजीयन के लिए हर समय एक हजार से अधिक छात्रों की वेटिंग रहती है। इसी तर्ज पर नालंदा-2 बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। साइंस कालेज चौपाटी को आमानाका ओवरब्रिज के नीचे तैयार हो रहे वेंडिंग जोन में शिफ्ट करेंगे। निगम ने यहां चौपाटी चलाने वालों को जगह खाली करने का नोटिस दे दिया है। 10 करोड़ खर्च, यूथ हब दिया था नाम
पिछली सरकार के दौरान स्मार्ट सिटी ने करीब दस करोड़ खर्च चौपाटी तैयार की थी। स्मार्ट सिटी ने इसे यूथ हब नाम दिया था। उसी समय राजेश मूणत और भाजपा नेताओं ने इसका विरोध किया था। अब चौपाटी का हटना तय हो गया है। साइंस कालेज परिसर में व्यावसायिक गतिविधि छात्रों के हित में नहीं है। यहां पर यूथ हब बनाने की योजना थी, चौपाटी नहीं। इसलिए हम यहां पर एक भव्य लाइब्रेरी बनाने के बारे में विचार कर रहे हैं। प्रस्ताव तैयार करने कहा गया है। प्रस्ताव तैयार होते ही शासन से इसकी स्वीकृति कराई जाएगी। -राजेश मूणत, विधायक रायपुर पश्चिम


