सहकारिता मंत्री केदार कश्यप मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल से मिले। उन्होंने कहा कि गन्ना विक्रेता कृषकों को जल्द भुगतान करना होता है। इसके लिए केंद्र सरकार के मासिक कोटे में छूट देते हुए अधिक शक्कर बेचने की अनुमति दी जाए। उन्होंने छत्तीसगढ़ में नाबार्ड के प्रशिक्षण संस्थान “बर्ड” की स्थापना की मांग भी की। उन्होंने कहा, इससे राज्य के पैक्स/ डीसीसीबी तथा अपेक्स बैंक के अधिकारी/ कर्मचारियों एवं संचालक मंडल सदस्यों एवं पदाधिकारियों के प्रशिक्षण की राज्य स्तरीय व्यवस्था हो सकेगी। उन्होंने केंद्रीय राज्य मंत्री को राज्य सरकार की मांगों के साथ ही केंद्र सरकार के विजन के अनुसार राज्य में हो रहे कामों की जानकारी भी दी। कश्यप ने बताया कि सहकार से समृद्धि को गति देने के लिए पैक्स कंप्यूटराइजेशन योजना के पहले चरण में 2028 पैक्स का चयन किया गया है। शेष 30 पैक्स तथा सहकार से समृद्धि के तहत प्रस्तावित 500 नवीन पैक्स के लिए सहमति जल्द दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में बहुउद्देशीय समितियों के गठन के लक्ष्य के तहत 641 नई समितियां गठित की गई हैं। इसमें से 512 का गठन अगस्त 2024 में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की समीक्षा बैठक के बाद की गई हैं। राज्य में कार्यरत 2058 पैक्स का पुनर्गठन कर 532 नए पैक्स के गठन की प्रक्रिया चल रही है। एक्सपोजर विजिट में छत्तीसगढ़ को शामिल किया जाए राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति के साथ एमओयू कश्यप ने बताया कि जैविक कृषि को बढ़ावा देने राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति और छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी लघु वनोपज संघ के बीच एमओयू किया गया है। संघ द्वारा जैविक समिति को 500 किलोग्राम आर्गेनिक शहद की आपूर्ति प्रक्रियाधीन है। मंत्री कश्यप ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह की बैठक के बाद किए गए कामों की जानकारी भी दी। पंडरिया शक्कर कारखाने का ब्याज माफ करें मंत्री कश्यप ने केंद्रीय राज्य मंत्री से प्रदेश के शक्कर कारखाना पंडरिया का लोन माफ करने की मांग की। उन्होंने बताया कि कारखाना बनाने के लिए एनसीडीसी से मिले टर्म लोन की राशि 17.21 करोड़ हो गई है। कारखाने की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए इसमें शामिल ब्याज की राशि 84.79 लाख को माफ किया जाए। कश्यप ने बताया कि राज्य मे सहकारी बैंक द्वारा अल्पकालीन कृषि ऋणों के लिए वर्ष 2024-25 मे राशि 8500 करोड़ का ऋण बांटने का लक्ष्य था। 7709 करोड़ का ऋण बांटा जा चुका है। नाबार्ड की अल्पकालीन कृषि ऋण हेतु रियायती ब्याज पुनर्वित्त योजना के तहत वितरित ऋण का 45% तक अल्प ब्याज दर पर पुनर्वित्त सहकारी बैंकों को उपलब्ध कराया जाना होता है।


