एक साल के बच्चे की हत्या कर महिला का सुसाइड:कानपुर में गला घोंट मारा, फिर लगाई फांसी; पुलिस-फॉरेंसिक जांच में जुटी

कानपुर में महिला ने एक साल की बच्ची की हत्या कर सुसाइड कर लिया। गला घोंट वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद खुद फांसी लगा ली। परिवार के लोगों ने दोनों को देखा, तो को पुलिस को बुलाया। पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर जांच करने पहुंची। जांच में घरेलू कलह से तंग होकर मर्डर और सुसाइड की बात सामने आ रही है। महिला उर्सला हॉस्पिटल कैंपस में काम करती थी। बच्चे का शव जमीन पर पड़ा था
कोतवाली थाना क्षेत्र के उर्सला अस्पताल कैंपस में एक निजी पैथोलॉजी में काम करने वाला सुमित अपनी पत्नी स्नेहा (26) और दादी रानी के साथ रहता था। दादी रानी उर्सल अस्पताल में सफाई कर्मचारी हैं, जबकि सुमित का बड़ा भाई रंजीत उर्सला में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। सुमित के दोनों भाई रंजीत, अमित और मां राजकुमारी के साथ आवास विकास कल्याणपुर में रहती हैं। दादी रानी ने बताया कि रोज की तरह सुमित और मैं दोनों लोग काम पर गए थे। देर शाम घर आए तो बच्चे का शव बेड पर पड़ा हुआ था जबकि बहू स्नेहा का शव फांसी के फंदे से लटक रहा था। पड़ोसियों की मदद से दोनों को उर्सला अस्पताल की इमरजेंसी में ले गए, जहां पर जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर कोतवाली थाने की पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर जांच करने पहुंची। कोतवाली थाना प्रभारी ने बताया कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि दंपती के बीच जमकर घरेलू कलह होती थी। मोहल्ले के लोगों और मायके से पहुंचे मृतक स्नेहा के पिता श्याम ने इस बात की तस्दीक की है। प्राथमिक जांच में तो लग रहा कि महिला ने अपने 15 महीने के बेटे सम्राट की गला घोंटकर हत्या करने के बाद खुद सुसाइड किया है। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही साफ हो सकेगा। जांच के बाद दोनों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मामला साफ हो जाएगा। मायके वाले जो भी तहरीर देंगे उसी आधार पर मामले में रिपोर्ट दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जाएगी। ———————— ये खबर भी पढ़िए… मां को गीता सुनाते-सुनाते बनीं संन्यासिनी, VIDEO; मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ी; जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जय अंबानंद गिरि की कहानी मैं 5 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थी। मां पढ़ी-लिखी नहीं थीं। बचपन में मां अपने बगल में मुझे बैठाकर गीता और भागवत पुराण आदि सुनाने को कहती थीं। पढ़ाई के बाद एक इंटरनेशनल कंपनी में मैनेजर बन गई, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया और संन्यास की तरफ बढ़ गई। यह कहना है श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जय अंबानंद गिरि का। पढ़िए पूरी खबर

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