एक साल में 131 बच्चे लापता, प्रेम प्रसंग में 16% तो परिजनों के डांटने पर 30% बच्चों ने घर छोड़ा

कम उम्र में प्यार और पढ़ाई न करने पर पैरेंट्स (पालकों) की डांट से बच्चे घर छोड़कर भाग रहे हैं। पिछले 1 साल में ही 131 बच्चे लापता हुए थे। ऑपरेशन मुस्कान के तहत कबीरधाम पुलिस इनमें से 119 बच्चों को देश के अलग-अलग राज्यों से ढूंढ़कर लाई है, उसकी केस स्टडी से ये चौंकाने वाला सच सामने आया है। ढूंढ़े गए 119 नाबालिग बच्चों में 102 बालिकाएं हैं। इनमें 23 फीसदी बालिकाएं लव अफेयर के झांसे में आकर घर छोड़ कर जा चुकी थी। पकड़े जाने पर इन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 1 जनवरी से 15 जनवरी 2024 में 131 बच्चे लापता हुए थे। इनमें 114 बालिकाएं हैं, जिनकी उम्र 15 से 17 वर्ष की है। कुल लापता बच्चों में से 119 को पुलिस ने ढूंढ निकाला है। इन बच्चों की काउंसिलिंग की गई, तो उनके घर से भागने की असली वजह सामने आई। 30 फीसदी बच्चे अपने परिजन की डांट से घर छोड़कर भागे थे। जबकि 16 फीसदी प्रेम प्रसंग और 23 फीसदी जबरन बहला-फुसला कर ले जाने के मामले सामने आए हैं। ऐसे मामले अक्सर आते हैं। नाबालिग बच्चियों को युवक प्रेम जाल में फांसकर घर से भगा ले जा जाते हैं। 19% 16% 30% 23% 7% 4% इस साल 1 जनवरी से 15 दिसंबर तक कबीरधाम जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से 131 बच्चे लापता रहे। इनमें 17 बालक और 114 बालिकाएं शामिल हैं। गुमशुदा बच्चों को खोजने के लिए पुलिस ने कड़े प्रयास किए। पुलिस ने खोजबीन को न सिर्फ कबीरधाम बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य तक सीमित नहीं रखा। बल्कि तमिलनाडु, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान जैसे दूरस्थ राज्यों तक टीमें भेजी गईं। तब जाकर 119 बच्चों को सुरक्षित वापस लाए। जानिए, क्या है पुलिस की ऑपरेशन मुस्कान योजना ऑपरेशन मुस्कान लापता बच्चों का पता लगाने और उनके पुनर्वास के लिए चलाई गई एक योजना है। इसे गृह मंत्रालय के अधीन संचालित किया जाता है। यह एक ऐसा अभियान है, जिसमें पुलिस अधिकारी-कर्मचारी लापता बच्चों की पहचान करने, उन्हें बचाने और उन्हें उनके परिवारों से मिलवाने के लिए कोशिश करते हैं। इसमें कई साल पहले गुमशुदा हुए बच्चों को भी पुलिस ने ढूंढ़कर निकाला है। इसमें सफलता मिल रही है।
पांडातराई थाना क्षेत्र के अचानकपुर गांव में 10 साल बाद माता-पिता से उसकी बिछड़ी बेटी मिली पाई। पुलिस ने उन्नाव (उप्र) से उनकी बेटी को ढूंढ निकाला, लेकिन जब पुलिस ने लड़की को बरामद किया तो वह अब बालिग हो चुकी है। बेटी को पाकर माता-पिता भावुक हो गए। 4 जनवरी 2015 को अचानकपुर निवासी गणेश केंवट ने अपनी 14 वर्षीय बेटी प्रभा के गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई थी। मामला 10 साल पुराना था। केस डायरी की जांच करने पर लापता लड़की का आधार कार्ड मिला। उक्त आधार नंबर को चॉइस सेंटर में सर्च कराया तो उसी आधार नंबर से ग्राम मवई घनश्याम, जिला उन्नाव (उप्र) के पते पर किसी उर्मिला के नाम पर राशन कार्ड बना होना पाया। इससे लापता लड़की का सुराग मिला। ज्यादातर नाबालिग बालिकाएं घर छोड़ रही हैं। कई मामले तो थाने तक पहुंच नहीं पाते। कई मामलों में पुलिस को सूचना में देरी हो जाती है। इसके कारण ढूढने में समय लगता है।

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