हाई कोर्ट ने की खंडपीठ ने एडीजे भर्ती: 2020 में वकील कोटे के 85 पदों पर केवल चार अभ्यर्थियों को ही एडीजे के पद पर नियुक्ति के लिए चयनित करने से जुड़े मामले में अदालती आदेश का पालन नहीं करने पर हाईकोर्ट रजिस्ट्रार (परीक्षा) पी.पी सिंह को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा है। जस्टिस पंकज भंडारी व शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह निर्देश नरेन्द्र मोहन की अवमानना याचिका पर दिया। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने आश्चर्य जताया कि मामले में आदेश दिए एक साल का समय हो गया है और हाईकोर्ट प्रशासन की एसएलपी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है, लेकिन फिर भी हाईकोर्ट प्रशासन ने आदेश की पालना नहीं की है। दरअसल अवमानना याचिका में कहा कि हाईकोर्ट ने 14 फरवरी 2024 को एडीजे भर्ती की परीक्षा सेल को योग्य विधिवेत्ताओं व प्रोफेसरों की कमेटी बनाने का निर्देश दिया था। वहीं कमेटी को कहा था कि वह हर पेपर की बीस कॉपियों को रेंडमली तौर पर परीक्षण कर मूल्यांकन करवाएं और उनमें मार्क्स दिए जाएं। इसके अलावा एडीजे भर्ती 2020 के खाली पदों को हाईकोर्ट की कार्रवाई के अधीन रखने के लिए कहा था। लेकिन हाईकोर्ट प्रशासन ने आदेश की पालना करने की बजाय इसे एसएलपी के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी खारिज होने पर भी पालना नहीं हुई है। इसलिए आदेश की पालना करवाई जाए। गौरतलब है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रार्थियों की याचिका निस्तारित कर राजस्थान हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वे मामले में विशेष बेंच बनाएं। याचिका में प्रार्थियों ने कहा था कि भर्ती परीक्षा के पेपर ज्यादा लंबे थे और साक्षात्कार में चार गुणा अभ्यर्थियों की बजाय केवल चार अभ्यर्थियों को ही बुलाया। जबकि भर्ती में 779 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए योग्य माना था। इसलिए योग्य अभ्यर्थियों को बोनस अंक देकर वकील कोटे के सभी खाली 81 पदों को भरा जाए।


