एडीसी ने फाइनल बिल न होने पर चारों फर्मों को अयोग्य बताया ​था, मगर यह एक्ट में नहीं

भास्कर न्यूज | अमृतसर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस लीसा गिल और रमेश चंद्र ढीमरी के बेंच ने इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के 52.40 करोड़ के टेंडरों को रद्द कर दिया है। इससे मामले में गठित 5 मेंबरी टेक्निकल इवेल्यूशन कमेटी खुद ही खत्म हो जाएगी। अब इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को नए सिरे से टेंडर निकालने होंगे। इससे रणजीत एवेन्यू 97 एकड़ और सी ब्लॉक में होने वाले विकास कार्य कम से कम तीन महीने के लिए लटक जाएंगे। जो कि पहले ही करीब चार साल से लटके हुए हैं। ट्रस्ट की सबसे ज्यादा कमाई कराने वाला इलाका अफसरों की हेराफेरियों के कारण बदहाल है। इस टेंडर के लिए ट्रस्ट ने शर्मा कांट्रेक्टर को सिलेक्ट किया था, लेकिन दूसरी बिडर कंपनी सीगल इंडिया की शिकायत के बाद टेंडर विवादों में आ गया। डीसी ने बिडिंग प्रक्रिया और कंपनियों के दस्तावेजों की जांच एडीसी से करवाई। इस जांच के आधार पर सरकार ने ट्रस्ट के 7 अफसरों को सस्पेंड कर दिया, जिन्हें अब कोर्ट बहाल भी कर चुका है। विवाद के बाद टेंडर रद्द करने की याचिका 15​ दिसंबर को हाईकोर्ट में लगी और अब आखिरकार टेंडर रद्द कर दिया गया। विभाग 7 या 15 दिन का नोटिस देकर टेंडर को पहले रद्द कर सकता था, लेकिन ऐसा करने की बजाय टेक्निकल इवैल्युएशन के लिए 5 मेंबरी कमेटी बना दी गई थी। टेंडर रद्द करने की याचिका पर बीते 15 जनवरी को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकारी एडवोकेट से पूछा था कि जब पहले ही मामला कोर्ट में चल रहा था तो इंक्वायरी के लिए टेक्निकल कमेटी बनाने की क्या जरूरत थी। फाइनेंशियल बिड ओपन होने के बाद किस नियम के तहत टेंडर इवैल्युएशन करवाई जा रही है। सरकार इसका वाजिब जवाब नहीं दे पाई। इसी मामले में 16 जनवरी को भी सुनवाई करते हुए को स्टेटस का ऑर्डर जारी कर अगली तारीख 20 जनवरी तय की थी। अब फाइल फैसला सुनाया गया। दैनिक भास्कर ने विभाग नोटिस जारी कर दोबारा से टेंडर निकाल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। अगर विभाग ऐसा करता तो विकास कार्य जल्द होने की उम्मीद बंधती। रिपोर्ट में टेंडर अप्लाई करने वाली चारों फर्मों को अयोग्य करार दिया गया था, जबकि ट्रस्ट की 7 मेंबरी कमेटी की टेक्निकल इवैल्यूएशन को गलत बताया था। हालांकि एडीसी वाली 3 मेंबरी जांच कमेटी में टेक्निकल इंजीनियर नहीं होने पर उनकी रिपोर्ट पर भी सवाल उठे थे। क्योंकि एडीसी शहरी डवलपमेंट से टेक्निकल काम का कोई अनुभव नहीं है। न ही डिप्टी कंट्रोलर और वाटर सप्लाई एंड सेनिटेशन विभाग के एक्सईएन विकास कार्यों की बारीकियों को समझते थे। टेंडर बिड दाखिल करने वाली सीगल इंडिया, शर्मा कांट्रेक्टर, राजिंदर इंफ्रास्ट्रक्चर और गणेश-कार्तिकेय को इसलिए अयोग्य करार दिया गया था क्योंकि इन चारों फर्म ने तय शर्तों को पूरा नहीं किया था। किसी ने भी उनकी ओर से किए गए कामों के फाइनल बिल डाक्यूमेंट्स नहीं लगाए थे। पंजाब टेंडरिंग एक्ट-2019 में फाइनल बिल लगाने का प्रावधान ही नहीं है। परफॉर्मेंस सर्टिफिकेट मांगा जाता है। यह सर्टिफिकेट सरकारी विभागों की तरफ से दिए जाते हैं। इसमें फर्म की ओर से करवाए गए कामों का ब्योरा रहता है। आज तक पंजाब में निकाले गए किसी टेंडर में फाइनल बिल की कॉपी मांगी ही नहीं गई।

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