रायपुर में एनआईटी चौपाटी को हटाने के बाद मामला थमने के बजाय और उलझ गया है। भारी विरोध और हंगामे के बीच एनआईटी परिसर से दुकानों की शिफ्टिंग तो कर दी गई, लेकिन नई जगह आमानाका में रेलवे और नगर निगम के बीच जमीन को लेकर विवाद अब भी जस का तस है। ऐसे में चौपाटी की शिफ्टिंग को लेकर असमंजस बना हुआ है। वहीं आज महापौर मीनल चौबे और विधायक राजेश मूणत ने मीडिया से बात करते हुए अपनी-अपनी स्थिति साफ की। “चौपाटी अवैध थी, इसलिए कार्रवाई की गई- महापौर मीनल चौबे महापौर मीनल चौबे ने कहा कि एनआईटी चौपाटी पूरी तरह अवैध थी।उन्होंने कहा- चौपाटी अवैध है इसलिए कार्यवाही की गई, पूरे चौपाटी को एक व्यवसाय़ी ने लिया था, लगातार उनके साथ स्मार्ट सिटी के अधिकारियों की बातचीत चल रही थी, व्यवसायी ने किराएदारों को गुमराह कर रखा था, शैक्षणिक स्थल के आसपास इस तरह की चौपाटी का हम विरोध करते हैं, शिफ्टिंग का काम प्रशासन का काम होता है, अगर कहीं कोई किंतु परंतु आता है तो हम किराएदारों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होने देंगे “विरोध पूरी तरह राजनीतिक – विधायक राजेश मूणत रायपुर पश्चिम से भाजपा विधायक राजेश मूणत ने चौपाटी के मुद्दे को राजनीतिक बताते हुए कहा— “चौपाटी का मामला नया नहीं है। कांग्रेस सरकार में भी हमने इसका विरोध किया था। यह जमीन नगर निगम की नहीं बल्कि खेल विभाग की है। भाजपा ने इसके खिलाफ 12 दिन तक धरना दिया था।” उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी ने इसे ‘यूथ हब’ बताकर बनाया और 29 लाख में संचालन एजेंसी को सौंप दिया।“60 दुकानों से हर महीने 25 हजार रुपए किराया लिया जा रहा था। कई दुकानें एग्रीमेंट के अनुसार चालू ही नहीं की गई थीं। इसलिए शिफ्टिंग की गई। कांग्रेस अब सिर्फ राजनीति के लिए विरोध कर रही है।”मूणत ने कहा कि चौपाटी की जगह जल्द ही नालंदा परिसर का निर्माण शुरू हो जाएगा। पूर्व महापौर एजाज़ ढेबर का पलटवार — “जब अफसरों ने डिजाइन पास किया था तब अवैध नहीं लगा?” पूर्व महापौर एजाज़ ढेबर ने चौपाटी हटाने को राजनीतिक फैसला बताया। उन्होंने कहा—“स्कूल-कॉलेज का बहाना दिया जा रहा है, तो बूढ़ापारा की चौपाटी वैध कैसे? वहां भी गर्ल्स स्कूल और शिक्षण संस्थान हैं। वहाँ सब सही और यहाँ सब गलत— यह दोहरा रवैया है। विधायक की जिद और बिना वजह कारणों के चलते सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया गया है।” आमानाका में जमीन विवाद बना बड़ी अड़चन चौपाटी को आमानाका में शिफ्ट करने की तैयारी थी, लेकिन जिस जमीन पर चौपाटी लगाने की बात की गई है, उस पर रेलवे ने 7 दिन में खाली करने का नोटिस चिपका दिया है। रेलवे का दावा है कि जमीन उनके अधीन है और यहाँ पार्किंग प्रोजेक्ट पहले से प्रस्तावित है। नगर निगम और रेलवे के बीच अब बातचीत चल रही है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है।


