भास्कर न्यूज़ | लुधियाना गुरु अंगद देव वेटरनरी एवं एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन द्वारा संचालित “पार्टनरशिप्स फॉर एक्सीलरेटेड इनोवेशन एंड रिसर्च” कार्यक्रम के तहत एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। इस राष्ट्रीय स्तर की शोध पहल के लिए कुल 90.53 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है, जिसमें से वेटरनरी यूनिवर्सिटी, लुधियाना को 4.08 करोड़ रुपए की ग्रांट प्राप्त हुई है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग और मार्गदर्शन आधारित नवाचार को बढ़ावा देना है। इस परियोजना के तहत वेटरनरी यूनिवर्सिटी, लुधियाना देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षण और शोध संस्थानों के साथ मिलकर कार्य करेगा। इनमें वीर सुरेंद्र साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी, बुरला; संबलपुर यूनिवर्सिटी, बुरला; ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च, भुवनेश्वर; फकीर मोहन यूनिवर्सिटी, बालासोर; इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, भुवनेश्वर; ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, भुवनेश्वर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, राउरकेला शामिल हैं। ये सभी संस्थान मिलकर एक शोध संघ बनाएंगे, जिसके अंतर्गत “सतत कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण के लिए प्रौद्योगिकियों का एकीकरण” विषय पर व्यापक अनुसंधान किया जाएगा। यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह ग्रांट विश्वविद्यालय की शोध अवसंरचना को मजबूत करेगी और पशु स्वास्थ्य, खाद्य नवाचार तथा सतत स्वास्थ्य देखभाल तकनीकों से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह शोध राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ वैश्विक वैज्ञानिक संवाद को भी नई दिशा देगा। निदेशक अनुसंधान डॉ. प्रकाश सिंह बराड़ ने भी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को इस प्रतिष्ठित अनुदान की प्राप्ति पर बधाई दी। इस परियोजना के अंतर्गत यूनिवर्सिटी तीन अंतर-विषयक उप-परियोजनाओं पर कार्य करेगा। पहली परियोजना पशुधन स्वास्थ्य निगरानी, उत्पादन अनुकूलन और स्थिरता सुधार के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित प्रणालियों पर केंद्रित है, जिसका नेतृत्व डॉ. देवेंद्र पाठक, डॉ. तेजिंदर सिंह और डॉ. नवदीप सिंह कर रहे हैं। दूसरी परियोजना गैर-तापीय तकनीकों के माध्यम से प्रोटीन की कार्यात्मक विशेषताओं को बढ़ाकर स्वास्थ्य लाभ वाले नवीन खाद्य उत्पादों के विकास पर आधारित है, जिसमें डॉ. सुनील कुमार, डॉ. रेखा चावला, डॉ. अंजू बूरा खटकर और डॉ. नरेंद्र कुमार चांदला शामिल हैं। तीसरी परियोजना स्वास्थ्य देखभाल के लिए जैविक रूप से अपघटनीय जैव-सामग्री के विकास पर केंद्रित है, जिसका नेतृत्व डॉ. मनु एम और डॉ. कुलदीप गुप्ता कर रहे हैं।


