राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक अहम प्रावधान है कि विद्यार्थी अपने कोर्स का 40% हिस्सा ऑनलाइन कोर्स कर सकते हैं। इसके क्रेडिट रेगुलर डिग्री में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। लेकिन, चार शैक्षणिक सत्र बीतने के बाद भी विद्यार्थियों को इसका फायदा नहीं मिल पाया। वजह ये है कि उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय इसके लिए तैयार ही नहीं हो पाए हैं। अगर ये सिस्टम लागू हो जाता तो यूजी-पीजी के करीब 16 लाख विद्यार्थियों को फायदा मिलता। मप्र के विवि में प्रोफेसरों की कमी है। ऐसे में विद्यार्थी देश-विदेश के विशेषज्ञों द्वारा तैयार ऑनलाइन कोर्स से पढ़ाई कर सकते थे। यहां बता दें कि स्वयं पोर्टल पर सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन मप्र के छात्रों के ही हैं। सिस्टम पर बड़ा सवाल… 10 करोड़ रुपए खर्च कर स्टूडियो बना दिए, कंटेंट का पता नहीं प्रावधान… मुफ्त से हो सकेगी पढ़ाई एनईपी में साफ कहा गया था कि छात्र मुफ्त (मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स) के जरिए पढ़ाई कर सकेंगे। कोर्स मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म पर होना चाहिए। अवधि 4 से 16 सप्ताह तक हो सकती है और 1 क्रेडिट लगभग 30 घंटे के अध्ययन कार्य के बराबर माना जाता है। इसके लिए कोर्स का सिलेबस से मेल खाना, पूर्व स्वीकृति, असाइनमेंट और प्रॉक्टर्ड परीक्षा पास करना जरूरी है। अमल… मुफ्त तैयार ही नहीं हुए चार साल बाद भी विश्वविद्यालयों ने न तो यूजी-पीजी स्तर पर सिलेबस के अनुसार मुफ्त तैयार किए और न ही स्वयं और एनपीटीईएल जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कोर्सेस को मैप कर छात्रों को बताया कि वे कौन-से कोर्स को ऑनलाइन मोड से कर सकते हैं। नियम यह है कि ऑनलाइन कोर्स करने पर तभी क्रेडिट ट्रांसफर हो सकता है, जब कंटेंट विवि के सिलेबस से मेल खाता हो। 10 जिलों में बनाए स्टूडियो… हैरानी की बात यह है कि उच्च शिक्षा विभाग ने 10 जिलों में करीब 10 करोड़ रुपए खर्च कर हाईटेक स्टूडियो बनाए हैं। इन्हें ऑपरेशनल मोड में लाने के लिए एजेंसी रखी है। इस पर भी करीब 5 करोड़ रु. खर्च होंगे। दावा है कि इनमें ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस ई-कंटेंट को मान्यता मिलेगी। एक प्रोफेसर बताते हैं, स्वयं और एनपीटीईएल पर भी ऐसे कोर्स कम हैं, जिनकी सूची सीधे छात्रों को सुनाई जा सके। इसके दो रास्ते हैं। या तो राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कोर्सेस को सिलेबस का हिस्सा बनाया जाए या फिर विवि स्तर पर सिलेबस के अनुसार नए मुफ्त तैयार कर उन्हें मान्यता दी जाए। स्वयं पोर्टल से ऑनलाइन कोर्स करने के लिए देश में सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन मप्र के छात्रों ने कराए हैं। स्वयं और एनपीटीईएल पर उपलब्ध कोर्सेस को बोर्ड ऑफ स्टडीज से मैपिंग कराई जा रही है। जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर ऑनलाइन कोर्सेस की लिस्ट जारी की जाएगी। छात्रों की सुविधा के लिए विभाग ई-कंटेंट भी तैयार कर रहा है, लेकिन इसे ऑनलाइन कोर्सेस की तरह संचालित करने के लिए यूजीसी की अनुमति लेनी होगी। इस बारे में विचार किया जाएगा। अनुपम राजन,एसीएस, उच्च शिक्षा विभाग


