गोमांस मामला:जांच बाकी, पर पुलिस ने नहीं मांगी असलम की रिमांड… कोर्ट ने 5 मिनट में 13 दिन के लिए भेजा जेल

जिंसी स्थित नगर निगम स्लॉटर हाउस में गोवंश वध और गोमांस सप्लाई के आरोपी असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा और ड्राइवर शोएब को पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद महज 10 मिनट में कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। पुलिस खुद मान रही है कि मामले में आगे की जांच अभी बाकी है, लेकिन इसके बावजूद रविवार को पूरी न्यायिक प्रक्रिया इतनी तेजी से पूरी कर दी गई कि आरोपी कोर्ट पहुंचे और जेल रवाना हो गए। रविवार को भोपाल जिला न्यायालय में ड्यूटी पर तैनात न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शरद जायसवाल दोपहर 1:27 बजे कोर्ट पहुंचे। इसके ठीक पांच मिनट बाद, 1:32 बजे पुलिस असलम और शोएब को लेकर कोर्ट पहुंची। औपचारिकताएं पूरी होते ही महज पांच मिनट में, 1:37 बजे दोनों आरोपियों को भोपाल जेल रवाना कर दिया गया। पुलिस ने कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि एसआईटी दोनों से पूछताछ कर चुकी है, लेकिन आगे की जांच अभी बाकी है। इसी आधार पर पुलिस ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का अनुरोध किया, जिस पर कोर्ट ने जेल वारंट जारी कर दिए। तीन दिन की रिमांड में हुई पूछताछ का ब्योरा पुलिस चालान में पेश करेगी। असलम के वकील का दावा- मांस के साथ छेड़छाड़ हुई आरोपी असलम की ओर से सीनियर एडवोकेट जगदीश गुप्ता ने कोर्ट में अपना वकालतनामा पेश किया। कहा- 17 दिसंबर 2025 की रात 11 बजे से रात 1 के बीच की घटना है। इस दौरान पुलिस की गैरमौजूदगी में बाहरी लोगों ने शोर मचाते हुए कंटेनर खोला था। उसमें रखे मांस के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि पुलिस कंट्रोल रूम से लेकर रुस्तम पुलिस कॉलोनी जहांगीराबाद के बीच का सीसीटीवी फुटेज पुलिस से मंगाकर कोर्ट के सामने पेश किया जाए। कोर्ट ने इस पर मंगलवार को विचार करने का समय दिया है। शाहपुरा थाने की गाड़ी से कोर्ट पहुंचा असलम… रविवार दोपहर एसआईटी असलम और शोएब को रिमांड पूरी होने के बाद भोपाल कोर्ट लेकर पहुंची थी। असलम और शोएब को पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में शाहपुरा थाना की गाड़ी में लेकर आया गया था। कोर्ट परिसर में असलम के एक दर्जन समर्थक मौजूद थे। इन धाराओं में मामला दर्ज : असलम के खिलाफ गोवंश वध प्रतिषोध अधिनियम 2004 की धारा 4 के तहत मामला दर्ज हुआ है। यह धारा गोवंश के वध पर रोक लगाती है। इसमें 7 साल की सजा का प्रावधान है। अधिनियम की धारा 5 में भी केस दर्ज हुआ है। यह गोवंश रखने, उसके परिवहन पर रोक लगाती है। बहस या नए आवेदन नहीं, इसलिए 10 मिनट लगे Q. कोर्ट में 10 मिनट में पेशी और जेल भेजना सामान्य है?
मामला केवल रिमांड पूरी होने के बाद औपचारिक पेशी का हो और कोई बहस या नए आवेदन न हों, तो प्रक्रिया कम समय में पूरी हो सकती है।
Q. फिर यह पेशी असामान्य क्यों लग रही है?
आमतौर पर ऐसे मामलों में केस डायरी का संक्षिप्त अवलोकन, आरोपियों की स्थिति, बचाव पक्ष की प्राथमिक दलील में समय लगता है। यहां प्रक्रिया10 मिनट में हो गई।
Q. क्या रविवार को ट्रायल या सुनवाई होनी थी?
नहीं। पुलिस के अनुसार यह केवल रिमांड के बाद की पेशी थी। ट्रायल या विस्तृत सुनवाई इस स्तर पर नहीं होती।
Q. क्या कोर्ट ने केस के तथ्यों पर कोई टिप्पणी की?
नहीं। कोर्ट ने पुलिस के आवेदन के आधार पर न्यायिक हिरासत का आदेश दिया। तथ्य और सबूतों पर विचार आगे होगा।
Q. पूरा मामला कब खुलेगा?
चालान पेश होने के बाद। पुलिस का कहना है कि चालान के साथ केस का पूरा ब्योरा, सबूत और जांच की दिशा कोर्ट के सामने आएगी।
(सुनील श्रीवास्तव, विशेष लोक अभियोजक)

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