एनईपी 2020 में छत्तीसगढ़ी साहित्य भाषा और संस्कृति को दिया महत्व

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव दिग्विजय कॉलेज में सत्र 2025-26 से स्नातक ऑनर्स की पढ़ाई शुरू होगी। हिंदी विभाग ने नया पाठ्यक्रम तैयार किया है। इसमें छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और संस्कृति को प्रमुखता दी गई है। प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता के निर्देश पर अध्ययन मंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. शंकर मुनि राय ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर प्रणाली लागू की गई है। हर सेमेस्टर में छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य का इतिहास, व्याकरण, मुहावरे, लोकोक्तियां, पहेलियां, लोक साहित्य, लोकगाथा, लोककथा, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी व्यंजन पढ़ाए जाएंगे। महाविद्यालय स्वशासी है, इसलिए पाठ्यक्रम में संशोधन और संवर्धन की सुविधा है। डॉ. राय ने बताया कि पाठ्यक्रम में छत्तीसगढ़ी वीर गाथा, पंडवानी और भरथरी जैसे लोकगीतों को शामिल किया गया है। छत्तीसगढ़ पीएससी को ध्यान में रखते हुए व्याकरण की सभी कोटियों को भी जोड़ा गया है। इससे विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलेगा। हिंदी ऑनर्स और एमए के पाठ्यक्रम में पंडित सुंदरलाल शर्मा, लोचन प्रसाद पांडे, प्यारेलाल गुप्त, श्यामलाल चतुर्वेदी, नारायण लाल परमार, डॉ. खूबचंद बघेल, संत धरमदास, मुकुटधर पांडे, हरि ठाकुर, द्वारिका प्रसाद तिवारी, परदेसी राम वर्मा जैसे साहित्यकारों की रचनाएं शामिल की गई हैं। साथ ही छत्तीसगढ़ के पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल की कृतियां भी इस सत्र से पढ़ाई जाएंगी। बोली, भाषा, संस्कृति को पाठ्यक्रम में शामिल करना सराहनीय कार्य: प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने कहा कि हिंदी विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप स्थानीय बोली, भाषा, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल कर सराहनीय कार्य किया है। अध्ययन मंडल की बैठक में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. अंजन कुमार, डॉ. बी. एन. जागृत, डॉ. प्रवीण कुमार साहू, डॉ. गायत्री साहू, डॉ. नीलम तिवारी, डॉ. वीरेंद्र कुमार साहू, कौशिक लाल बिशी और पूर्व छात्र डॉ. लोकेश शर्मा शामिल हुए।

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