भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा एनएमडीसी कर्मचारी मजदूर संगठन के लोग 27 फरवरी से बचेली और किरंदुल में क्रमिक भूख हड़ताल शुरू की थी, अब 6 मार्च से कर्मचारियों ने ओवर टाइम काम भी बंद कर दिया है, जिसका असर अब एनएमडीसी को पड़ने लगा है। दोनों परियोजना में मेन पावर की कमी है, मजदूरों के द्वारा ओवर टाइम ड्यूटी कर एनएमडीसी के उत्पादन पर असर नहीं पड़ने दिया जाता था, पर अब मांगें पूरी नहीं होने से मजदूरों ने ओटी बंद कर दी है जिसकी वजह से अब एनएमडीसी को नुकसान पहुंचने लगा है। एसकेएमस और इंटक दोनों मजदूर संगठन क्रमिक भूख हड़ताल कर रहे हैं। एनएमडीसी मजदूर संगठन की 4 मांगें हैं, जिसमें जनवरी 2022 से एनएमडीसी के नियमित श्रमिकों का लंबित वेतन समझौता अतिशीघ्र लागू किया जाए। एनएमडीसी में लंबित भर्ती प्रक्रिया की अधिसूचना शीघ्र जारी किया जाए, अप्रैल 2024 से लंबित ठेका श्रमिकों के वेतन समझौते की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाए, प्रबंधन व मजदूर संगठनों के बीच लागू द्विपक्षीय समझौते का उल्लंघन बंद करने की मांग मजदूर संगठन द्वारा की जा रही है। रायपुर में हुई बैठक में नहीं निकला निष्कर्ष एनएमडीसी बचेली और किरंदुल को मिलाकर करीब 4 हजार एनएमडीसी कर्मचारी हैं, जो पर्याप्त नही हैं। इसको लेकर भी मजदूर संगठन नई भर्ती करने की मांग कर रहें हैं। बचेली इंटक अध्यक्ष चंद्रा मंडावी ने बताया प्रबंधन के माध्यम से हम अपनी बात सरकार को कह रहे हैं, पर लंबे समय से हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मजदूर संगठन और प्रबंधन के बीच रायपुर में एक बैठक हो चुकी है, पर हड़ताल समाप्त हो जाए ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया, जिसके बाद अब 17 मार्च को लेबर कमिशनर मध्यस्थता करेंगे और प्रबंधन और मजदूर संगठन के बीच वार्ता होगी, तब तक क्रमिक भूख हड़ताल और ओवर टाइम काम पर मजदूर नहीं जाएंगे।


