भारत में मेडिकल एजुकेशन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सफलता मिली है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने 19 दिसंबर, 2024 को जारी अधिसूचना से एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए 150 सीटों की ऊपरी सीमा समाप्त कर दी है। शुक्रवार को सांसद संजीव अरोड़ा ने कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय कॉलेजों को बुनियादी ढांचे के आधार पर अतिरिक्त सीटों के लिए आवेदन करने में सक्षम बनाता है। उन्होंने जुलाई में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया को पत्र लिखकर सुझाव दिए थे। सांसद ने मेडिकल एजुकेशन में सुधार के लिए 9 फरवरी, 2024 को संसद में क्वालिटी ऑफ मेडिकल एजुकेशन इन इंडिया पर केंद्रित रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट में एमबीबीएस की सीटों की सीमा समाप्त करने की सिफारिश की गई थी। सांसद अरोड़ा ने कहा कि 19 दिसंबर को नेशनल मेडिकल कमीशन ने भारत के सभी मेडिकल कॉलेज-मेडिकल इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल-डीन को पत्र लिखकर नए मेडिकल कॉलेज-संस्थान की स्थापना के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं, जिसका उद्देश्य शैक्षणिक साल 2025-2026 के लिए एक स्थापित चिकित्सा संस्थान में स्नातक पाठ्यक्रम की पेशकश करना और यूजी सीटों की संख्या में वृद्धि करना है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसदीय स्थायी कमेटी के सदस्य इस बदलाव को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कमेटी ने इस विषय की समग्र जांच के लिए मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी से बातचीत की थी और मेडिकल एजुकेशन की गुणवत्ता से संबंधित जमीनी हकीकत का आकलन करने के लिए 10 से 11 जुलाई, 2023 तक मुंबई और गोवा का अध्ययन दौरा भी किया था। उन्होंने कहा कि क्वालिटी ऑफ मेडिकल एजुकेशन इन इंडिया विषय की पहचान करने के पीछे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसदीय स्थायी कमेटी का प्राथमिक उद्देश्य सुधार के क्षेत्रों की खोज करना था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मेडिकल ग्रेजुएट्स स्वास्थ्य सेवा वितरण के उभरते परिदृश्य को नेविगेट करने के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित हो सके।


