एनजीटी में जाएंगे उद्यमी:खारा में अब जल प्रदूषण, 60 बीघा क्षेत्र में फैला जहरीला पानी, रोज मर रहे पशु

रीको औद्योगिक क्षेत्र में वायु प्रदूषण के बाद अब जल प्रदूषण की समस्या गहरा गई है। इसके समाधान से रीको ने हाथ खींच लिए हैं। उद्यमी अब इस मुद्दे पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में जाने की तैयारी कर रहे हैं। बीछवाल और करणी औद्योगिक क्षेत्र में फैले फैक्ट्रियों के केमिकल युक्त जहरीले पानी की समस्या का समाधान दस साल बाद भी नहीं हो पाया है। इसके साथ ही अब खारा औद्योगिक क्षेत्र में भी ऐसी ही समस्या खड़ी हो गई है। वहां वूलन मिल, दाल मिल सहित विभिन्न फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषित पानी के तीन तलाब बन चुके हैं। उसका पानी पीने से पशु मर रहे हैं, जिन्हें उठाने वाला कोई नहीं है। मृत पशुओं की सड़ान गांव तक जाती है तो लोगों का सांस लेना दूभर हो जाता है। खारा गांव के लोग पहले पीओपी फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषित धुएं और गर्द से परेशान थे। अब प्रदूषित पानी समस्या बना हुआ है। दरअसल रीको के खारा ही नहीं करणी और बीछवाल औद्योगिक क्षेत्र में भी फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी सबसे बड़ी समस्या है। हैरत की बात ये है कि रीको के सभी उद्यमियों से सर्विस चार्ज तो हर साल वसूला जाता है, लेकिन सुविधाओं पर खर्च कभी नहीं किया जाता। तीनों औद्योगिक क्षेत्रों में गंदे पानी की समस्या का समाधान सीईटीपी लगाने से ही संभव है, मगर रीको ने इस पर से हाथ खींच लिए है। जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि ने इस समस्या का समाधान करने के लिए रीको एमडी को हाल ही में एक अर्द्धशासकीय पत्र लिखा है। कलेक्टर ने साफ लिखा है कि गंदे पानी के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है। उधर रीको अधिकारियों को कहना है कि राजस्थान में कहीं पर भी रीको ने सीईटीपी नहीं लगाया है। यह रीको की पॉलिसी में नहीं आता। उद्यमियों को ही एक संचालन समिति गठित करके सीईटीपी लगाना होगा। रीको का रवैया देखते हुए उद्यमियों ने अब एनजीटी में जाने का फैसला किया है।

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