26 हजार करोड़ से हो रहे एनसीएल के मेगा विस्तार से एचईसी को 5000 करोड़ के वर्कऑर्डर मिलने का भरोसा
नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल), सिंगरौली में 26 हजार करोड़ रुपए की मेगा विस्तार परियोजना का काम शुरू हो गया है। इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाना है, जिसमें पहले चरण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। इस विस्तार से हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) को आने वाले सात साल में करीब 5000 करोड़ रुपए के वर्कऑर्डर मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। दरअसल, एनसीएल में अब तक इस्तेमाल हो रहीं 80 प्रतिशत से ज्यादा मशीनों की आपूर्ति एचईसी द्वारा की गई है। इसी भरोसे को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार को एनसीएल के उच्चाधिकारियों की टीम और एचईसी के तीनों निदेशकों के बीच लंबी मैराथन बैठक हुई। इस बैठक में दोनों संस्थानों के बीच भविष्य के कार्यों और भुगतान को लेकर अहम सहमति बनी। प्रबंधन सूत्रों ने बताया- बैठक में तय हुआ कि एचईसी को पहले चरण में 60 करोड़ रुपए का वर्कऑर्डर दिया जाएगा। इसके अलावा एक साल के भीतर कुल 100 करोड़ रुपए तक के ऑर्डर जारी किए जाएंगे। परियोजना के आगे बढ़ने के साथ एचईसी को और भी बड़े वर्कऑर्डर मिलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। इस बैठक में एचईसी के डायरेक्टर्स बीएस. गर्ग, मुकेश कुमार और मनोज कुमार शामिल हुए। वहीं एनसीएल के डायरेक्टर फाइनेंस और डायरेक्टर टेक्नीशियन के साथ पूरी टीम शामिल रही। 10 करोड़ का भुगतान इसी माह करेगी एनसीएल
प्रबंधन सूत्रों के मुताबिक, एनसीएल के साथ हुई बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि एचईसी द्वारा पिछले 15 दिनों में डिस्पैच किए गए उत्पादों के करीब 10 करोड़ रुपए का भुगतान इसी दिसंबर में जारी किया जाएगा। इससे कंपनी को तात्कालिक वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, एनसीएल की 26 हजार करोड़ रुपए की विस्तार परियोजना एचईसी के लिए दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है। माना जा रहा है कि इस परियोजना से एचईसी को न केवल बड़े वर्कऑर्डर मिलेंगे, बल्कि उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। एनसीएल से जुड़े 72 करोड़ के स्पेयर्स के वर्कऑर्डर पहले से हैं
एचईसी के एक अधिकारी के अनुसार, फिलहाल कंपनी के पास एनसीएल से जुड़े 72 करोड़ रुपए के स्पेयर्स का पेंडिंग वर्कऑर्डर है, जिसे अगले छह महीनों में पूरा किया जाना है। इसके अलावा कोल हैंडलिंग प्लांट (सीएचपी) के लिए 198 करोड़ रुपए के वर्कऑर्डर भी एचईसी के पास हैं, जो वर्ष 2020-21 में मिला था। इस प्रोजेक्ट का 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, शेष कार्य मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में एचईसी के पास कुल 550 करोड़ रुपए के वर्कऑर्डर हैं। वर्कऑर्डर आने पर एचईसी अपनी पूरी क्षमता से काम करेगा। वर्क ऑर्डर पूरा करने में कामगार कोई कसर नहीं छोड़ेंगे : यूनियन
एचईसी श्रमिक संघ के अध्यक्ष सन्नी सिंह ने कहा कि एचईसी एशिया की सबसे बड़ी मशीन निर्माता कंपनी है और इसमें अपार उत्पादन क्षमता मौजूद है। कहा कि यदि पर्याप्त वर्क ऑर्डर मिलते हैं तो यहां के श्रमिक पूरी क्षमता के साथ काम करेंगे और एचईसी को आगे ले जाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्क ऑर्डर के साथ-साथ नई भर्तियों की भी आवश्यकता होगी। वर्तमान में एचईसी में 911 स्थायी और लगभग 1300 अस्थायी कर्मी कार्यरत हैं। वहीं, एचईसी मजदूर संघ के महामंत्री रामाशंकर प्रसाद ने कहा कि एचईसी द्वारा निर्मित मशीनें उच्च गुणवत्ता की होती हैं। एचईसी ने चंद्रयान मिशन के लिए लॉन्चिंग पैड, रक्षा क्षेत्र तथा रेलवे के लिए कई महत्वपूर्ण मशीनें बनाई हैं।


