भास्कर न्यूज | जांजगीर ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण को लेकर पहल शुरू की गई है। इसके तहत गांवों में मौजूद तालाबों, कुओं और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों की जियो-टैगिंग की जाएगी। सभी जल स्रोतों की ऑनलाइन गिनती कर उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। जल संकट के समाधान और भविष्य की जल सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सातवीं लघु सिंचाई संगणना और दूसरी जल निकाय संगणना का कार्य गांवों में शुरू किया गया है। इसकी खास बात यह है कि गांव के प्रत्येक तालाब, कुएं और बोरवेल का डेटा अब कागजों के बजाय डिजिटल मैप पर उपलब्ध होगा। पुराने तरीकों को छोड़कर मोबाइल एप और वेब पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन डेटा एकत्र किया जाएगा। इसके लिए जिले के तहसीलदार और पटवारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। तहसीलों को आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हीं के माध्यम से पटवारी मोबाइल से जल स्रोतों की जियो-टैगिंग करेंगे। गांव में जल स्रोत की सटीक भौगोलिक स्थिति दर्ज की जाएगी। योजनाओं के लिए होगा लाभ… इस डिजिटल डेटाबेस का उपयोग भविष्य में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और अटल भूजल योजना जैसी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में किया जाएगा। इस संगणना में पहली बार देश के झरनों को भी शामिल किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में झरनों का संरक्षण महत्वपूर्ण माना गया है। इसके अलावा प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं को भी इस डिजिटल दायरे में शामिल किया गया है, ताकि जल संसाधनों की पूरी जानकारी उपलब्ध हो सके। अतिक्रमण के साथ पानी की बर्बादी पर लगेगी रोक जियो-टैगिंग से सरकारी तालाबों और जल निकायों पर अवैध कब्जे पर रोक लगेगी। उपग्रह चित्रों और पोर्टल पर दर्ज डेटा के मिलान से यह पता चल सकेगा कि किस स्थान पर जल स्रोत था और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है। इससे उन इलाकों की पहचान भी आसान होगी, जहां भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है।


