एमपी बीजेपी में जिला अध्यक्षों का फॉर्मूला तय:4 साल से ज्यादा समय वाले नहीं होंगे रिपीट; पैनल तैयार, हर जिले से एक महिला शामिल

मध्यप्रदेश में भाजपा के जिला अध्यक्षों के चुनाव का फॉर्मुला तय हो गया है। 4 साल से ज्यादा समय वाले जिला अध्यक्ष रिपीट नहीं होंगे। जिले वार नामों का पैनल तैयार किए गए हैं। हर जिले में एक महिला शामिल है। भोपाल स्थित मध्यप्रदेश बीजेपी ऑफिस में गुरुवार सुबह 11 बजे से जिला अध्यक्षों को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी और पर्यवेक्षकों के साथ चर्चा की गई। देर शाम तक जिले वार रायशुमारी में सामने आए नामों का टेबुलेशन चार्ट बनाया गया। जिसके बाद प्रदेश चुनाव पर्यवेक्षक सरोज पांडे, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और प्रदेश चुनाव अधिकारी विवेक शेजवलकर के साथ निर्वाचन अधिकारियों और पर्यवेक्षकों ने चर्चा की। जिला अध्यक्षों के लिए यह फार्मूला तय
बीजेपी में यह तय हो गया है कि जिन जिला अध्यक्षों को चार साल से ज्यादा का वक्त हो गया है, उन्हें रिपीट नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही जिन जिला अध्यक्षों को डेढ़ साल से कम समय हुआ है, उन्हें फिर मौका मिल सकता है। लेकिन, जिले में पार्टी के नेता, विधायक, सांसद, कार्यकर्ता उनके खिलाफ नहीं होने चाहिए। पैनल में हर जिले से एक महिला शामिल
बीजेपी पदाधिकारियों ने हर जिले से रायशुमारी में आए कुल नामों की मेरिट लिस्ट के आधार पर तीन नामों का पैनल बनवाया। इन तीन नामों में अगर किसी महिला का नाम नहीं है, तो रायशुमारी की मेरिट में सबसे ऊपर वाली महिला कार्यकर्ता का नाम भी पैनल में जोड़ा गया। इसके अलावा अगर तीन नामों के पैनल में कोई एसटी/एसटी नहीं आया, तो मेरिट के आधार पर जिले की आबादी के हिसाब से एसटी/एससी वर्ग का एक नाम पैनल में शामिल किया गया है। इसलिए जोड़े गए दो नाम
बीजेपी के एक सीनियर पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी महिलाओं को भी संगठन में शामिल करना चाहती है। ऐसे में 60 संगठनात्मक जिलों में से करीब 12 से 16 महिलाओं को जिला अध्यक्ष बनाया जा सकता है। अगर जिले में मेरिट के आधार पर बने तीन नामों के पैनल में कोई महिला और एसटी/एसटी वर्ग के कार्यकर्ता का नाम ही नहीं आया और उस जिले में पार्टी महिला को कमान देना चाहती है या सामाजिक समीकरणों में एससी/एसटी से अध्यक्ष बनाना है, तो पैनल में महिला के साथ इन वर्गों के नाम भी शामिल किए गए हैं। दावेदारों ने की जिलाध्यक्षों की शिकायत
मध्य प्रदेश में भाजपा जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर घमासान छिड़ा है। जिन जिलों के अध्यक्ष रिपीट होने की संभावना है, वहां सबसे ज्यादा गहमागहमी है। ऐसे जिलों के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता प्रदेश नेतृत्व के पास जिलाध्यक्षों की शिकायतें लेकर पहुंचे। घोषित होने के बाद बदले गए मंडल अध्यक्षों ने भी स्थानीय नेताओं की शिकायत की है। जिलाध्यक्षों की फर्जी सूची वायरल
बीजेपी जिला अध्यक्षों की फर्जी सूची वायरल होने पर बीजेपी के प्रदेश चुनाव अधिकारी रजनीश अग्रवाल ने पत्र जारी कर कहा है कि मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही सूचना भ्रामक है। अभी संगठनात्मक प्रक्रिया चल रही है। जिला अध्यक्षों की घोषणा अभी तक नहीं की गई है। 1-2 दिन में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति
प्रदेश में भाजपा के 60 जिलाध्यक्ष बनाए जाने हैं। इसके लिए प्रभारी अपनी जिम्मेदारी और संगठन की ओर से तय की गई भूमिका के मुताबिक जिला अध्यक्षों के चयन में सक्रिय हैं। संभावना जताई जा रही है कि 1-2 दिन में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति हो जाएगी। सांसदों से तीन-तीन नाम मांगे गए
सभी की सहमति बने और सर्वमान्य व्यक्ति को जिलाध्यक्ष की कमान सौंपी जाए, इसके लिए सांसदों से तीन-तीन नाम मांगे गए हैं. इतना ही नहीं पार्टी के पूर्व विधायक से लेकर पूर्व सांसद, पंचायत प्रतिनिधि और नगरीय निकायों के प्रतिनिधियों से जिलाध्यक्ष के मसले पर विचार विमर्श करने को कहा गया है। 33 प्रतिशत महिलाओं को जगह
भाजपा 33 प्रतिशत महिलाओं को संगठन में जगह देने की तैयारी में है। बूथ समितियों में इसका पालन किया गया है। अब पार्टी की कोशिश है कि जिला अध्यक्षों के चयन में भी 33 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी रहे। इसके लिए कई नामों की चर्चा भी है। प्रदेश में महिलाओं की सत्ता-संगठन में हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिशें हो रही है। यही वजह है कि राज्य से राज्यसभा में भी तीन महिला सांसद हैं।

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