भास्कर न्यूज|लुधियाना पंजाब रोडवेज की बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा अब सवालों के घेरे में आ गई है। सरकार द्वारा विभागों में नई बसें न लाने के कारण पुरानी बसें कंडम हालत में हैं। इन बसों की सीटें जर्जर हो चुकी हैं, शीशे और फ्रंट बॉडी भी टूटी व जंग लगी हुई हैं। वहीं, बसों की बॉडी को पेंट तो किया गया है, लेकिन अंदर से वह पूरी तरह खराब हो चुकी हैं। इसके अलावा, कई बसों के टायर भी घिस चुके हैं, फिर भी ट्रांसपोर्ट विभाग के मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर द्वारा इन बसों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया गया है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या यह लापरवाही नहीं है, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है। लुधियाना डिपो से करीब 50 बसें पंजाब के विभिन्न जिलों में चलती हैं, जिनमें से 10 बसों की हालत खराब है। पंजाब रोडवेज की इन बसों में रोजाना 52 से अधिक सवारियां सफर करती हैं। यात्रियों का कहना है कि इस हालत में सफर करना खतरे से खाली नहीं है और प्रशासन को तुरंत इन बसों की हालत सुधारनी चाहिए। {पीबी 10 डीएम 8067: शीशा टूटा, फ्रंट बाडी खराब {पीबी 10 एफएफ 2439: बाडी खराब, टेपिंग भी नहीं, सीट फटी {पीबी 65 एडी 5461: बॉडी खराब, पेंट से की लिपा पोती {पीबी 10 एफएफ 1528: पेंट से लिपा पोती {पीबी 10 एफएफ 4956: सीट फटी, बॉडी खराब पंजाब रोडवेज की बसों की जब फिटनेस होती है तो उसके लिए पहले पंजाब रोडवेज के इंस्पेक्टर द्वारा कागज तैयार किए जाते है। इसके बाद फिटनेस के लिए समय लिया जाता है। जब बस मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) के पास जाती है तो उनके द्वारा सरकारी बस होने के कारण पूरी तरह से निरीक्षण न कर चेसिस नंबर नोट करके व फोटो करके भेज दिया जाता है। इन बसों इस लिए कमी नहीं निकाली जाती क्योंकि यह सरकारी बसें है। ^उन्होंने कुछ दिन पहले ही जॉइन किया है। बसों की फिटनेस के समय हर चीज को अच्छी तरह से चेक किया जाता है। इसमें सीट से लेकर वाहन की बॉडी, लाइट, चक्के आदि चीजों को चेक किया जाता है। ये सब चींजे सही पाई जाने पर ही फिटनेस हो सकती है। अगर उनसे पहले ये काम हुआ है तो गलत है। जबकि टैक्स लमसम होते है और इंश्योरेंस एक्जंप्ट होती है। -फुलवीर सिंह, एमवीआई ^उनकी गाड़ी ठीक कंडीशन में है। अगर कोई गाड़ी खराब है और उसकी फिटनेस जारी हुआ है तो इसे चेक करवाएंगे। -नवराज बातिश, जीएम, पंजाब रोडवेज लुधियाना


