एम्स नवाचार से दिव्यांगों और बुजुर्गों का जीवन आसान बनाएगा:​​​​​​असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी सहयोगी केंद्र शुरू, डॉक्टर बोले-विकलांगता और हैंडीकैप में अंतर समझना जरूरी

एम्स भोपाल में ICMR, एनसीएएचटी और एम्स नई दिल्ली के सहयोग से इंटर-एम्स सहयोग: असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी सहयोगी केंद्र (CCAHT) की स्थापना की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य स्वदेशी, किफायती और उपयोगकर्ता केंद्रित असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी का विकास करना है। यह पहल आयातित उत्पादों पर निर्भरता को कम करने और भारत की स्थानीय जरूरतों के अनुसार समाधान तैयार करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य उन करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाने की कोशिश है, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में सहायक तकनीकों की जरूरत होती है। दुनिया भर में करीब 2.5 अरब लोग किसी न किसी असिस्टिव प्रोडक्ट पर निर्भर हैं, लेकिन इनमें से बड़ी आबादी आज भी महंगे उपकरणों और सीमित उपलब्धता के कारण इससे वंचित है। भारत में भी दिव्यांगजन और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी के लिए सुलभ और किफायती असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी जरूरत को समझते हुए एम्स भोपाल ने ICMR और एम्स दिल्ली के सहयोग से यह पहल शुरू की है। विकलांगता और हैंडीकैप में अंतर समझना जरूरी
एम्स भोपाल ने यह स्पष्ट किया कि विकलांगता और हैंडीकैप एक जैसी चीजें नहीं हैं। विकलांगता किसी शारीरिक, संवेदी, मानसिक या सामाजिक कमी को दर्शाती है, जबकि हैंडीकैप समाज और पर्यावरण की उन बाधाओं से बनता है, जो व्यक्ति की कमी को और कठिन बना देती हैं। सही तकनीक, सुलभता और समर्थन मिलने पर कई विकलांग व्यक्ति हैंडीकैप्ड नहीं रहते। असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी क्यों है जरूरी
असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजी का मकसद लोगों को स्वतंत्र रूप से जीने, संवाद करने, सीखने और काम करने में मदद करना है। इसमें व्हीलचेयर और प्रोस्थेटिक्स से लेकर संचार उपकरण, संवेदी सहायता, डिजिटल हेल्थ सॉल्यूशन और एआई आधारित तकनीकें शामिल हैं। ये तकनीक न केवल शारीरिक सीमाओं को कम करती हैं, बल्कि व्यक्ति को सम्मान और समान भागीदारी का अवसर भी देती हैं। अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, करीब एक अरब लोग आज भी जरूरी असिस्टिव टेक्नोलॉजी से वंचित हैं। इसकी वजह ऊंची लागत, सीमित उत्पादन, जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य प्रणालियों में AHT का कमजोर समावेश है। भारत में भी यही स्थिति है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक उन्नत तकनीक की पहुंच सीमित है। आयातित उपकरण महंगे होने के साथ-साथ कई बार स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नहीं होते। पहला असिस्टिव टेक्नोलॉजी मेड-टेक हैकाथॉन
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एम्स भोपाल ने हाल ही में असिस्टिव टेक्नोलॉजी कॉफी टेबल मेड-टेक हैकाथॉन 2025 का आयोजन किया। इस हैकाथॉन में युवाओं, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद 12 नवाचारी AHT परियोजनाओं का चयन किया गया, जो अब डिजाइन, प्रोटोटाइप और परीक्षण के चरण में जाएंगी।

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