प्रोस्टेट कैंसर पर इलाज के नए तरीके से अब काफी हद तक काबू पाया जा सकता है। एम्स भोपाल के ताजे अध्ययन ने साबित कर दिया है कि अगर कैंसर स्थानीय स्तर पर फैल चुका है, तो प्रोस्टेट को निकालने से मरीज लंबा जीवन जी सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस शोध में शामिल 30 मरीजों को प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए “रेडिकल प्रॉस्टेटेक्टमी (प्रोस्टेट को पूरी तरह से निकालना) किया गया। शोध में पाया गया कि इस इलाज से न केवल कैंसर को नियंत्रित किया गया, बल्कि मरीजों का जीवन भी बेहतर हुआ। तीन महीने बाद, इन मरीजों में पीएसए (प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन) के स्तर में जबरदस्त गिरावट देखी गई, जो कैंसर के नियंत्रण का संकेत है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस इलाज से यह स्पष्ट होता है कि सही उपचार विधि और समय पर किए गए इलाज से कैंसर के खिलाफ जीत हासिल की जा सकती है, और मरीजों को लंबा और स्वस्थ जीवन मिल सकता है। इस शोध का नेतृत्व डॉ. कुमार माधवन, डॉ. देवाशीष कौशल, डॉ. केतन मेहरा और डॉ. निकिता श्रीवास्तव ने किया, और इसे अंजाम दिया डॉ. उदीत खुुराना, जो यूरोलॉजी विभाग में रेजिडेंट हैं।


