एम-सेवा पोर्टल पर 85 पार्षदों की आईडी बनी डिजिटल वेरीफिकेशन और साइन की ट्रेनिंग पूरी

भास्कर न्यूज|अमृतसर जाली सर्टिफिकेट तैयार करने से रोकने के लिए निगम के एम-सेवा पोर्टल पर 85 पार्षदों की आईडी बनाने का काम कंपलीट होने के बाद सेवा केंद्र की टीम ने डिजिटल वेरीफिकेशन और साइन के बारे ट्रेनिंग दी। पार्षदों की तरफ से पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए गए। दरअसल, ऑफलाइन प्रक्रिया के दौरान जालसाज जाली मोहर-हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर सर्टिफिकेट तैयार कर देते थे। जिस पर नकेल कसने के लिए सरकार ने 5 माह पहले ई-सेवा पोर्टल में सरपंचों की आईडी बनाने का आदेश जारी किया था। जिसके बाद 859 ग्राम पंचायतों के सरपंचों की आईडी बनाकर ट्रेनिंग देने का काम बीते जनवरी माह तक कंपलीट कर लिया गया था। लेकिन निगम देर से होने के कारण पार्षदों की आईडी नहीं बन पाई थी। फिलहाल, अब शहरी इलाके के लोगों को जरूरी सर्टिफिकेट बनवाने को लेकर पार्षदों के दफ्तरों-घरों का चक्कर नहीं काटना होगा। सेवा केंद्र से अप्लाई के बाद पार्षद डॉक्यूमेंट ऑनलाइन वेरिफाई करेंगे। सबकुछ ठीक मिलने पर डिजिटल साइन से अप्रूव कर देंगे। इसके बाद यह सर्टिफिकेट पटवारियों व उच्च अफसरों के पास फाइनल अप्रूवल के लिए चली जाएगी। आधार-मोबाइल नंबर से आईडी लिंक होने के कारण किसी तरह के गड़बड़ियों की गुंजाइश भी कम रहेगी। इसके पहले ऑफलाइन सिस्टम के दौरान लोग सर्टिफिकेट बनाने को लेकर पटवारी के पास जाते तो उन्हें वेरीफिकेशन के लिए सरपंच-पार्षद या नंबरदार के पास भेज दिया जाता था। लेकिन घर से बाहर रहने, मीटिंग या किसी अन्य कारण से पार्षद-सरपंच नहीं मिलते तो लोगों को बार-बार चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ता था। सर्टिफिकेट के लिए सेवा केंद्रों से अप्लाई होने के बाद पार्षदों की आईडी में डॉक्यूमेंट ट्रांसफर होने के बाद अपने लेवल पर जांच कर सकेंगे। यदि कोई शख्स ऐसा है, जिसकी पहचान ऑनलाइन डॉक्यूमेंट्स के जरिए नहीं हो पा रही तो पार्षद घर पर किसी को भेजकर वेरीफिकेशन करा सकेंगे। यदि कोई त्रुटियां व गलत दस्तावेज लगाया तो उसे रिजेक्ट कर सकते हैं।

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