मध्य प्रदेश में ‘लव जिहाद’ और धर्म परिवर्तन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल जून तक ही ऐसे मामलों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी थी। साल 2021 से जून 2025 के बीच प्रदेश में धर्म परिवर्तन के कुल 305 मामले दर्ज हुए। इनमें से 236 लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन कराने के हैं। यानी 77 फीसदी मामलों में धर्म परिवर्तन लव जिहाद के जरिए कराया गया। यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है स्टेट एसआईटी की रिपोर्ट में। इस एसआईटी का गठन भोपाल में कॉलेज छात्राओं से सामने आए हाईप्रोफाइल लव जिहाद मामले के बाद मई में हुआ था। एसआईटी ने उन शहरों की भी मैपिंग की है जहां धर्म परिवर्तन के मामले ज्यादा हो रहे हैं। इसमें 88 केस के साथ इंदौर टॉप पर है और भोपाल दूसरे नंबर पर। हालांकि तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि साढ़े चार साल में ऐसे सिर्फ 7 मामलों में सजा हुई है, जबकि 51 में आरोपी बरी हो गए। इसकी मुख्य वजह पीड़िता ने खुद आरोपी से प्रेम संबंध की बात कबूली है। 162 मामले न्यायालय में अब भी विचाराधीन हैं। लव जिहाद के जिन मामलों में आरोपियों को सजा हुई, ऐसी दो पीड़िताओं की आपबीती… असली पहचान खुली तो धमकाने लगा
4 साल पहले घर के पास रहने वाले युवक ने असली पहचान छिपाकर मुझसे जान-पहचान बढ़ाई। शादी के भरोसे में लेकर गलत काम किया। शादी की बात हमेशा टाल जाता था। इस बीच उसकी हकीकत सामने आई। पता चला वह मुस्लिम है। पहचान खुलने पर मुझे धमकाने लगा। उसने मेरा जीवन बर्बाद कर दिया। मैं इतनी परेशान हो गई हूं कि कभी-कभी लगता है जान दे दूं। पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हूं। रिश्ते टूट गए और अपने छूट गए। लोगों का रवैया बदल गया है। एफआईआर हुई-सब कुछ हुआ लेकिन परेशानी खत्म नहीं हुई है। आर्थिक रूप से भी मेरा शोषण किया गया। मेरे ऊपर कर्ज हो गया, हर समय मानसिक तनाव में रहती हूं। अब सिर्फ न्याय चाहिए। -जैसा पीड़िता ने बताया कॅरियर खत्म हुआ, जिंदगीभर का दर्द मिला
उस लड़के ने सबकुछ बर्बाद कर दिया। वह समय मेरे और परिवार के लिए सबसे कठिन समय था। आप समझ सकते हैं इस तरह के मामलों में पीड़िता और उसके परिवार के समय किस तरह के हालात होते हैं। शुरू में मुझे ही गलत साबित करने की कोशिश की गई। शिकायत दर्ज कराने के लिए कई जगह भटकी, तब सुनवाई हुई। मेरी हिम्मत टूट चुकी थी। खुदकुशी की कोशिश की, तब परिवार ने मुझे बचाया। कई दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच लड़ी। परिवार और दोस्तों से मिली हिम्मत की वजह से मैं यह लड़ाई लड़ पा रही हूं। इस केस का सबसे बुरा असर मेरे कॅरियर पर हुआ। जिदंगी भर न भूलने वाला दर्द मिला है। -जैसा पीड़िता ने बताया भास्कर एक्सपर्ट – पीड़िता बालिग तो उसकी मर्जी अहम ऐसे मामलों में पीड़िता का बयान और उम्र अहम होती है। बालिग पीड़िताएं जो कहती हैं वही मायने रखता है। अगर पीड़िता कहती है कि उसे आरोपी के साथ रहना है तो कोई कुछ नहीं कर सकता। ऐसा भी देखने में आया है पीड़िता के बयान आरोपी के पक्ष में है और घरवालों के बयान उसके खिलाफ। इन हालात में केस कमजोर हो जाता है। -दीपक अग्रवाल, रिटा. जस्टिस, मप्र हाईकोर्ट आरोपी इसलिए बरी ज्यादातर पीड़िताएं बोलीं-सहमति से बनाए थे प्रेम संबंध ऐसे मामलों की जांच गुणवत्तापूर्ण तरीके से करने के निर्देश दिए हैं। रोकथाम के लिए हर स्तर पर प्रयास जरूरी हैं। संस्थानों में निगरानी कमेटी ठीक से काम करें, यह अहम है।
अभय सिंह, आईजी, हेड स्टेट एसआईटी


