एसईसीएल की आवासीय कॉलोनियों में सफाई नहीं, कागजों में हो रहा सफाई का काम
सफाई ठेकेदार हो रहे मालामाल प्रबंधन कुंभकर्णी निद्रा में
कोतमा। एसईसीएल की आवासीय कॉलोनियों में नियमित सफाई का अभाव बना हुआ है। नालियों में सफाई अभियान नहीं चलाया गया। श्रमवीरों का कहना है कि गोविंदा, लहसुई कॉलोनी और जमुना कॉलरी में प्रबंधन के द्वारा सफाई कार्य नहीं करवाया जा रहा है। सफाई के अभाव में लोग दुर्गंध के बीच गुजर बसर करने मजबूर है। कॉलोनी में जगह-जगह एवं नालियों के किनारे घास का अंबार लगा हुआ है। नतीजा घरों में मच्छरों का आतंक काॅलोनी में रह रहे लोगों के लिए सिर दर्द बना हुआ है। कॉलोनी में पानी बिजली व सड़कों की देखरेख का जिम्मा कालरी प्रबंधन का है। एक मेडिकल डिस्पेंसरी संचालित है जहां पर श्रमवीरों एवं उनके परिवार को नियमित सुबह-शाम चिकित्सा की लाभ की व्यवस्था है। उसके आसपास भी गंदगी भरी पड़ी है।
सफाई के नाम ठेकेदार हो रहे मालामाल
सूत्रों से मिली खबर के अनुसार जमुना कॉलरी की आवासीय कॉलोनियों में सफाई का ठेका जिन ठेकेदारों को दिया गया है वे विगत 30 वर्षों जमुना नेटवर्क, कभी भवन निर्माण तो कभी कॉलोनियों में सफाई को ठेका लेते रहे हैं। जानकार बताते हैं कि ये ठेकेदार अपना निवास बिलासपुर में बना रखा है। कभी-कभार कॉलरी क्षेत्र का चक्कर लगा जाते हैं। और ये तब कॉलरी क्षेत्र में आने को तब मजबूर होते. हैं जब किसी स्थानीय नेता या प्रबंधन के अधिकारियों को किसी आयोजन को संचालित करना होता है। जानकार बताते हैं कि जिन क्षेत्रों में में और कॉलोनियों में इन्हें सफाई का ठेका दिया गया है वहीं नगरपालिका ने भी उन्हीं काॅलोनियों का जिम्मा ले रखा है। अब सच्चाई क्या है यह गहन जांच का विषय है।
कॉलोनियों मे बदहाली के बीच श्रमवीरों का परिवार
कॉलानियों में सबसे ज्यादा शिकायत नाली की नियमित सफाई को लेकर है। बताया गया है कि प्रबंधन द्वारा ठेके के माध्यम से सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। लेकिन ठेकेदार के द्वारा इन कॉलोनी में साफ सफाई नहीं करवाई जाती है, जिसके कारण इन कॉलोनियों में जगह-जगह गंदगी जमा है जगह-जगह कचरे का ढेर लगा हुआ है। झाड़ियां के साथ ही घास भी उगे हुए हैं, नालियों में जाम और सड़न के कारण दुर्गंध आ रही है। नगर पालिका और काॅलरी प्रबंधन के दो पाट में फंसा सफाई, नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 12 एवं 13 जो कि क्षेत्र अंतर्गत आता है और इन कॉलोनियों की सफाई की व्यवस्था का जिम्मा कालरी प्रबंधन ने भी ले रखा है। हकीकत में सफाई के नाम पर केवल लूट हो रही है। कोल प्रबंधन के द्वारा सफाई के नाम पर हर साल लाखों रुपए खर्च किए जा रहे किंतु सफाई की व्यवस्था ज्यों कि त्यों बनी हुई है। वर्तमान में नगर पालिका के द्वारा कॉलोनी में सफाई कर्मचारियों के माध्यम से सफाई करवाई जा रही है।
मजदूर संघ ने उठाए थे सवाल
हाल ही में कुछ दिन पहले ही भारतीय मजदूर संघ के साथ जमुना कोतमा क्षेत्र के प्रबंधक की आयोजित एक बैठक में स्टाॅफ ऑफिसर सिविल को तलब किया गया था, उस बैठक में मजदूर संघ के नेताओं ने एक स्वर में सिविल अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार और घोर लापरवाही का आरोप लगाया था बैठक में स्टाॅफ अफसर सिविल की कार्यशैली और हठधर्मिता से नाराज मजदूर नेताओं ने श्रमिकों के काॅलोनियों में फैली गंदगी और सफाई के नाम पर ठेकेदारों से सांठगांठ कर सरकारी पैसों की बंदरबांट का भी आरोप लगाया था। ज्ञात हो की इससे पूर्व जनवरी माह में स्टाफ अफसर सिविल पर किसी जायसवाल नाम के व्यक्ति को ठेके देने के मामले में कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जा चुका है इस पत्र में स्टाॅफ ऑफिसर के द्वारा नियम कानूनों को ताक में रख कर कथित ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का आरोप लगा था, बताया जाता है कि इस आरोप पत्र में टेंडर भरने वाले सभी पक्ष एक ही सर नेम वाले ही थे। आरोप यह लगा था कि सभी एक ही परिवार से सम्बन्धित हैं नियमों की अनदेखी कर ठेका स्टाॅफ ऑफिसर सिविल के चहेते ठेकेदार को दिया गया था, जिसकी जांच जारी है और स्टाॅफ ऑफिसर सिविल से उच्चाधिकारियों ने स्पष्टीकरण भी मांगा है।
रेड्डी और घोष दो ठेकेदार कर रहे बंटाधार
वर्षो से कोलियरी से करोडो रुपये के वर्क आर्डर लेकर पैसों के बंदरबांट कर रहे दो ठेकेदारों के अतिरिक्त कालोनी की सफाई का काम और किसी को नहीं मिलता है। सूत्र बताते हैं कि केबल नेटवर्क और छतो पर चढ़ कर काम करने वाला कथित ठेकेदार हाल के वर्षो में करोड़पति है यहां तक की अब फुनगा के पास एक विशाल आधुनिक सुविधाओं से युक्त पब्लिक स्कूल खोलने की जुगत में भी है जानकार लोगो का यह भी मानना है की वर्ष भर कॉलरी में सफाई के नाम पर पैसो के खेल में ये इतने माहिर है की मजदूर नेता, अधिकारी सब को मैनेज कर सकने का हुनर ये बखूबी जानते है। आम मजदूर और कर्मचारी गंदी काॅलोनियों में रहने को विवश हैं अगर स्टाॅफ अफसर और कथित ठेकेदारों के विरुद्ध कोई शिकायत करता है तो इनके पैसो पर ऐश कर रहे मजदूर नेता उसके खिलाफ पुलिस में झूठा मुकदमा भी दर्ज करा देते हैं। यदि समय रहते एसईसीएल की सतर्कता विभाग और केंद्रीय एजेंसीयां सूक्ष्मता से जांच करे तो मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है।


