कॉर्निया की खराबी के कारण अंधकार में जी रहे लोगों के जीवन में उजाला लाने के लिए एसएमएस में अब ‘आई बैंक’ खोलने की तैयारी कर ली है। हूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक्ट (होटा) के तहत पंजीकरण, रिकाॅर्ड और निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया जाएगा। अगले 3 माह में कॉर्निया रिट्राइवल से लेकर प्रोसेसिंग और संरक्षण जैसे काम एसएमएस का खुद का आई बैंक करेगा। इसके लिए चरक भवन स्थित दूसरी मंजिल पर जगह चिह्नित कर ली है। यहां तक कि लेमिनार फ्लो हुड, स्पेक्युलर, ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और आधुनिक मशीन-उपकरणों की खरीद प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। साथ ही तकनीकी विशेषज्ञों की कमेटी का गठन भी किया है। नेशनल मेडिकल कमिशन (एनएमसी) नई दिल्ली की गाइडलाइन में पीजी कोर्सेज संचालित करने वाले संस्थान में आई बैंक होने से न केवल नेत्रदान करने वालों बल्कि छात्रों को भी फायदा मिलेगा। अभी तक आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान ही कॉर्निया कलेक्शन से लेकर प्रोसेसिंग का काम कर रही है। 23 वर्ष में 26 हजार कॉर्निया कलेक्शन, 17 हजार लाभान्वित आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के अध्यक्ष बी.एल. शर्मा के अनुसार 23 साल में 26 हजार कॉर्निया कलेक्शन कर चुके हैं। इससे 17 हजार लोग लाभान्वित हुए है। एसएमएस आई बैंक खोल रहा है, अच्छी बात है। लेकिन प्रशासन ने बिना किसी कारण से 80 दिन से हमारा काम बंद कर रखा है। सोसायटी ने न केवल राजस्थान में बल्कि देशभर में रिकाॅर्ड बनाया है। उपयोगिता दर भी 64 फीसदी है। “एसएमएस आई बैंक खोलने का निर्णय ले चुका है। नए साल में काम करने लगेगा। हमारे पास फैकल्टी और रेजीडेंट उपलब्ध है। पीजी करने वालों को भी फायदा मिलेगा। संचालित सोसायटी से करार में संशोधन किया जाना है।” -डॉ. दीपक माहेश्वरी, प्राचार्य, एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर “मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को विभाग की ओर से आई बैंक खोलने का प्रस्ताव बनाकर भेजा है, जिसमें मैनपावर, उपकरण शामिल हैं। टेंडर प्रक्रिया प्रोसेस में है।” -डॉ. मृणाल जोशी, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल


