एसजीपीसी के पूर्व 16 कर्मियों पर एफआईआर के बाद अब जांच के लिए एसआईटी गठित, सीपी भुल्लर करेंगे निगरानी

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 पावन स्वरूपों की गुमशुदगी मामले में 9 साल बाद जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। सिट को डायरेक्टर ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेश्न चंडिगढ़ ऑफिस से बनाया गया है। इसमें चेयरमैन समेत 6 पुलिस ऑफिसरों को मेंबर बनाया गया है। सिट अमृतसर सीपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर की निगरानी में जांच करेगी, जबकि एआईजी विजिलेंस मोहाली जगतप्रीत सिंह को सिट का चेयरमैन बनाया है। इसके अलावा मेंबरों में डीसीपी जांच सिटी रविंदरपाल सिंह संधू, एडीसीपी सिटी हरपाल सिंह संधू, एसपी डी पटियाला गुरबंस सिंह बैस, एसीपी लुधियाना बेअंत जुनेजा और एसीपी डी सिटी हरमिंदर सिंह शामिल हैं। 7 दिसंबर को थाना डी-डिवीजन में एसजीपीसी के पूर्व 16 मुलाजिमों पर पर्चा दर्ज किया गया था। सरकारी दखल सीधा श्री अकाल तख्त साहिब को चुनौती : धामी गठित सिट पर एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा, धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप अनावश्यक है। यह सिख परंपराओं के विरुद्ध और श्री अकाल तख्त साहिब को सीधा चुनौती है। पावन स्वरूपों की गुमशुदगी वाले प्रकरण में अब मोड़ आया है। विवाद 2016 में उजागर हुआ था। उस समय सीएम परकाश सिंह बादल थे। 2017 में सत्ता बदली और कैप्टन अमरिंदर सिंह सीएम बने। बाद में चरणजीत सिंह चन्नी आए, पर तीनों सरकारों में यह मामला फाइलों में दब गया। अब चौथे सीएम भगवंत मान ने पहली बार निर्णायक कार्रवाई की है। एफआईआर में 2013 और 2016 के दौरान तत्कालीन सचिव डॉ. रूप सिंह, धर्म प्रचार कमेटी के पूर्व सचिव मनजीत सिंह, उपसचिव गुरबचन सिंह, उपसचिव निशान सिंह, उपसचिव वित्त सतिंदर सिंह, सुपरवाइजर गुरमुख सिंह, क्लर्क बाज सिंह, अकाउंटेंट जुझार सिंह, हेल्पर दलबीर सिंह, सहायक कमलजीत सिंह,​ जिल्तसाज कुलवंत सिंह, जिल्तसाज जसप्रीत सिंह, पूर्व मुख्य सचिव गुरचरन सिंह, सीए सतिंदर सिंह कोहली, सेवादार अमरजीत सिंह और इंचार्ज परमजीत सिंह के नाम शामिल हैं। अब सभी आरोपियों से सवाल-जवाब होंगे। सभी सवालों का जबाव लेकर अमृतसर सीपी रिपोर्ट तैयार कर एआईजी मोहाली को सौपेंगे। वहीं, आरोपियों में से 10 ने जिला कोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी, जिसें कोर्ट ने शनिवार को खारिज कर दिया था।

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