शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने सोमवार को अचानक पीसी बुलाकर पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की टाइमिंग बड़ी अहम है, क्योंकि मंगलवार को निगरान कमेटी की बैठक भी होनी है। इस्तीफे से पहले धामी ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह हटाने के संबंध में जो एतराज जताया है वह उससे दुखी हैं। ऐतराज से जाहिर होता है कि हरप्रीत सिंह को पद से हटाने का कारण उन्हें माना जा रहा है। इसलिए वह इस्तीफा दे रहे हैं। धामी ने कार्यकारी कमेटी को इस्तीफा सौंपा है। अब इसपर फैसला कमेटी को लेना है। धामी ने कहा िक उन्होंने और कार्यकारी कमेटी के 14 कार्यकारी सदस्यों ने डेढ़ घंटा तक सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने के बाद ज्ञानी हरप्रीत सिंह को हटाने का फैसला किया था। इस दौरान सभी को बोलने का समय दिया गया था, ताकि किसी के विचार रह ना जाएं। वह फैसले की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे रहे हैं, क्योंकि वह प्रधान हैं। धामी ने 4 महीने पहले चौथी बार एसजीपीसी के प्रधान की कुर्सी संभाली थी। उधर, ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने धामी के इस्तीफे को दुखद करार दिया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल उन्होंने कहा, पंथक सोच का प्रतिनिधित्व करने वालों को अपमानित कर बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है या फिर इस तरह से दबाव बनाया जा रहा है कि व्यक्ति खुद को अलग करने के लिए मजबूर हो जाए। इसलिए पद छोड़ा: ज्ञानी हरप्रीत सिंह को हटाने के फैसले को ज्ञानी रघबीर सिंह ने बताया था गलत श्री दमदमा साहिब तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को हफ्ता पहले पद से हटाने के एसजीपीसी के फैसले को श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने पोस्ट डालकर गलत ठहराया था। कहा-ज्ञानी हरप्रीत सिंह को पद से हटाने का कारण और तरीका उचित नहीं है। यदि किसी भी तख्त साहिब के जत्थेदार साहिब के खिलाफ किसी प्रकार के आरोपों की जांच की आवश्यकता हो, तो यह केवल श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा ही कराई जा सकती है। दो मुद्दे ठंडे बस्ते में पहला: ज्ञानी हरप्रीत सिंह को हटाने और सिंह साहिबानों की अनदेखी का है। अगले कुछ दिन एसजीपीसी के प्रधान पद को लेकर सरगर्मियां तेज होंेगी। तब तक फैसले पर पुनर्विचार नहीं हो पाएगा। दूसरा मुद्दा : श्री अकाल तख्त साहिब ने िशअद प्रधान और सदस्यता अभियान की निगरानी के लिए 7 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। उस कमेटी की परवाह किए बिना शिअद नेताओं ने सदस्यता अभियान के लिए अलग कमेटी बनाई थी। पंथक हलकों में इस पर पनप रहा रोष कुछ िदन शांत रहेगा। ज्ञानी हरप्रीत सिंह के इस्तीफे पर पुनर्विचार नहीं, निगरान कमेटी की अनदेखी पर पर्दा जत्थेदार ज्ञानी रघबीर िसंह के जताए ऐतराज के बाद एसजीपीसी अध्यक्ष एचएस धामी के इस्तीफे से सिख कौम में पांच साहिबानों की नियुक्ति, निष्कासन और रिटायरमेंट की प्रक्रिया के नियम तय करने की बहस तेज होगी। इसे लेकर 25 साल से मांग चल रही है, मगर अब आवाज को बल मिलेगा। यह मांग श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी पूर्ण सिंह को हटाने जाने से शुरू हुई थी। उस समय बीबी जगीर कौर प्रधान थी। बीबी जगीर कौर को ज्ञानी पूर्ण सिंह की कार्यप्रणाली पसंद नहीं थी। {शेष पेज 6 पर एक इस्तीफा दो काज एचएस धामी आगे क्या.. इस्तीफे पर कार्यकारी कमेटी लेगी फैसला सिख मसलों के माहिर एस पुरुषोत्तम के अनुसार जत्थेदार से मौखिक तौर पर धामी के इस्तीफे पर कार्यकारी कमेटी राय लेगी। उसके बाद ही मंजूरी या नामंजूरी का फैसला होगा। इस्तीफा मंजूर होने की संभावना ज्यादा है। मार्च में एसजीपीसी का बजट इजलास है, इसीलिए इस्तीफा मंजूर किए जाने के बाद कार्यकारी


