ब्यावर में एसीबी की टीम को मंगलवार को उस समय झटका लगा जब रिश्वत मांगने का आरोपी क्लर्क कार्रवाई से ठीक पहले मौके से फरार हो गया।
एसीबी को शिकायत मिली थी कि बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय (वितरण) में कार्यरत आकाश नामक बाबू एक पीड़ित से रिश्वत की मांग कर रहा था। एसीबी के निर्देश पर पीड़ित ने रिश्वत की राशि बाहर दी और उसके फोटो भी खींचे गए। इसके बाद टीम आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए रवाना हुई। दुपहिया वाहन से हुआ फरार
टीम को अधीक्षण अभियंता कार्यालय (वितरण) पहुंचना था, लेकिन गलती से वह प्रसारण कार्यालय पहुंच गई। वहां पूछताछ करने पर कर्मचारियों ने बताया कि आकाश नाम का कोई बाबू वहां कार्यरत नहीं है। जब टीम दोबारा अधीक्षण अभियंता एम.के. सिंघल के कार्यालय पहुंची, तब तक आरोपी बाबू एक फौजी के दुपहिया वाहन से फरार हो चुका था। मकान पर भी पहुंची टीम, नहीं मिली सफलता
इसके बाद एसीबी टीम ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय में ही डेरा डालकर कार्रवाई शुरू की। सूत्रों के अनुसार आरोपी बाबू ने 40 हजार रुपए की रिश्वत ली थी, जबकि उसकी मांग इससे अधिक बताई जा रही है। एसीबी ने अपने उच्चाधिकारियों को आरोपी के फरार होने की सूचना दी और उसकी तलाश जारी है।
सूत्रों के मुताबिक आरोपी बाबू आकाश के अजमेर स्थित पंचशील कॉलोनी के मकान पर भी एसीबी कर्मियों को तैनात किया गया, लेकिन देर रात तक वहां कोई सफलता नहीं मिली। पेट्रोल पंप के लिए एनओसी के बदले में ली घूस
जानकार सूत्रों ने बताया कि पूरा मामला एक पीड़ित उपभोक्ता से जुड़ा है, जिसने अपने पेट्रोल पंप के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की मांग की थी। यह फाइल पिछले कई महीनों से विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में बिना किसी ठोस कारण के अटकी हुई थी। उपभोक्ता ने कई बार कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में जब उसने फाइल की स्थिति की जानकारी जुटाई, तो पता चला कि एनओसी जारी करने के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों तक को भ्रष्टाचार की राशि देनी पड़ेगी। परेशान होकर और कोई रास्ता न बचने पर पीड़ित ने एसीबी का सहारा लिया।


