भास्कर न्यूज | अमृतसर एडीसीपी हरपाल सिंह को धरनाकारियों को ‘मैन्नूं वी जट्ट दा पुत्त न कहीं जे तेरा धरना न चुकाया’ कहना महंगा पड़ गया है। मामला एससी कमीशन के पास पहुंचा, जिसका कड़ा संज्ञान लिया गया है। कमीशन के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने घटना को निंदनीय कहा और 10 फरवरी को एडीसीपी हरपाल सिंह को कमीशन के सामने पेश होने की हिदायत दी है। गढ़ी ने सुओमोटो एक्शन लेते हुए जांच करने का फैसला किया है। इस संबंधी पुलिस कमिश्नर को भी लिखित आदेश जारी किए गए हैं। कमीशन की ओर से कहा गया है कि 30 जनवरी 2026 को वाल्मीकि समाज के लोगों की ओर से बिना नोटिस नौकरी से निकाले लोगों की बहाली की मांग को लेकर धरना दिया था। धरने पर बैठे लोगों को हटाने के लिए एडीसीपी हरपाल सिंह मौके पर पहुंचे थे, जिनकी समाज के लोगों के साथ गहमागहमी भी हुई। इस दौरान एडीसीपी ने उन्हें सख्त लहजों में चेतावनी दी कि ‘मैन्नूं वी जट्ट दा पुत्त न कहीं जे तेरा धरना न चुकाया’। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो एससी कमीशन के पास पहुंचा, जिसके बाद सुओमोटो एक्शन लेते हुए इसकी जांच करने का फैसला लिया है। कमीशन के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी का कहना था कि एडीसीपी हरपाल सिंह की ओर से ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल किया जाना भारतीय संविधान के कानूनों की उल्लंघन है। हम सभी भारतीय है न कि किसी व्यक्ति की जाति अहंकार में बंधे हुए जातिवाद लोग है। संवैधानिक पदों और सरकारी पद पर बैठकर जाति अहंकार में जाति शब्दावली का इस्तेमाल करना, देश का कानून इसकी इजाजत नहीं देता। इससे शहर ही नहीं पूरे पंजाब का माहौल जातिवाद बन गया है।


