ऑनलाइन गेमिंग ने 14 साल के बच्चे को बनाया चोर:रिचार्ज करवाने के लिए पड़ोसी के घर में तीन बार चोरी, लाखों का कैश-गहने उड़ाए

भीलवाड़ा में ऑनलाइन गेम का रिचार्ज करवाने के लिए 14 साल के बच्चे ने पड़ोस के घर में तीन बार चोरी की। पहली बार में कैश चुराया। जब किसी को मालूम नहीं चला तो दूसरी बार फिर खिड़की के रास्ते घुसा और कैश उठा लाया। तीसरी बार करीब साढ़े तीन लाख कैश और लाखों के गहने चुरा लिए। पुलिस ने मामले में मंगलवार को नाबालिग को डिटेन किया। उससे ज्वेलरी खरीदने वाले ज्वेलर और एक दोस्त को भी गिरफ्तार किया है। खिड़की से घुसता था नाबालिग थाना प्रभारी कैलाश चंद्र ने बताया- 20 जनवरी को एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी। इसमें बताया कि थाना इलाके में उनके दो मकान हैं, जिनमें से एक रात के समय खाली रहता है। यानी उसमें रात में कोई नहीं रहता। मकान के पीछे की ओर एक खिड़की अक्सर खुली रहती थी। मकान के पास रहने वाले एक नाबालिग ने पहले भी दो बार इसी खिड़की से घर में घुसकर चोरी की थी। तब उसने छोटी रकम चुराई थी।। इस बार बड़ी वारदात हुई तो रिपोर्ट करनी पड़ी। इसके बाद पुलिस ने जांच कर नाबालिग को डिटेन किया। गेमिंग की लत के लिए पहले भी की चोरी SHO कैलाश चंद्र ने बताया- पूछताछ में नाबालिग ने स्वीकार किया कि वह पहले भी चोरी कर चुका है। चोरी के पैसों से वह मोबाइल पर ऑनलाइन गेम फायरफॉक्स खेलता था। इसमें रिचार्ज करवाना पड़ता है। उसका रिचार्ज खत्म होता तो वह चोरी के पैसों से रिचार्ज करवाता था। नाबालिग ने कबूल किया कि गेमिंग की लत ने उसे बार-बार चोरी करने के लिए मजबूर किया। दोस्त और ज्वेलर को भी पकड़ा SHO कैलाश चंद्र ने बताया- जांच में सामने आया कि नाबालिग का एक दोस्त भी इसमें शामिल था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर 4 दिन की रिमांड पर लिया है। चोरी का सामान ज्वेलरी व्यापारी को बेचा गया था। उसे भी गिरफ्तार कर एक दिन के रिमांड पर लिया गया। मामले में गेमिंग और अन्य चोरियों को लेकर जांच की जा रही है। SHO ने बताया- नाबालिग को मोबाइल पर ऑनलाइन गेम फायरफॉक्स के लिए गेमिंग आईडी और रिचार्ज की सुविधा देने वाले के तलाश जारी है। उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
अपग्रेड के लिए पैसे मांगते हैं मनोचिकित्सक डॉ. वीरभान चंचलानी ने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग का बच्चों के दिमाग पर गहरा असर पड़ रहा है। गेम खेलने पर दिमाग में डोपामाइन रिलीज होता है, जिससे बच्चे बार-बार गेम खेलने लगते हैं। ज्यादातर गेम शुरू में फ्री होते हैं, लेकिन बाद में ये अपग्रेड के लिए पैसे मांगते हैं। तब तक ऐसे गेम बच्चों को लत लगा चुके होते हैं। इसके बाद बच्चा पैसे चुराने के लिए मजबूर हो जाता है।

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