डूंगरपुर में राजस्थान आदिवासी संघ ने समाज सुधार के लिए कई कड़े फैसले लिए हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष भूपत सिंह भगोरा और प्रदेश उपाध्यक्ष सुखलाल अहारी ने एक पत्रकार वार्ता में 28 सूत्रीय कार्यक्रम के तहत इन निर्णयों की जानकारी दी। इसका उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करना है। प्रदेश उपाध्यक्ष सुखलाल अहारी ने बताया कि संगठन ने समाज को नई दिशा देने के लिए काम शुरू कर दिया है। इसके तहत शादियों और अन्य आयोजनों में होने वाले अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाई गई है। आदिवासी समाज में अब शादी-ब्याह में अधिकतम 30 तोला चांदी और सोना ही मान्य होगा। साथ ही, नकद राशि 15,051 रुपए तय की गई है। संघ ने समाज में डीजे बजाने, बर्थडे पार्टी मनाने, रिंग सेरेमनी और साफा प्रथा पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, समाज में फैल रही शराब की लत को खत्म करने के लिए शादी समारोहों में शराब पर भी पाबंदी लगाने का निर्णय लिया गया है। राजस्थान आदिवासी संघ ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति इन निर्णयों के खिलाफ जाता है, तो उस पर 51,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा और उसे समाज से बहिष्कृत करने का कदम उठाया जाएगा। हालांकि, संघ के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि सक्षम परिवार यदि बंद कमरे में अधिक खर्च या लेन-देन करता है, तो उस पर संघ को कोई आपत्ति नहीं है। अहारी ने बताया कि संगठन असामाजिक तत्वों और आपराधिक घटनाओं का पुरजोर विरोध करता है। आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही, समाज के भविष्य को संवारने के लिए बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सुखलाल अहारी ने कहा कि उनका लक्ष्य समाज में फैली कुरीतियों को दूर कर एक स्वच्छ और शिक्षित आदिवासी समाज का निर्माण करना है। इसके लिए संगठन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


