रायपुर में राष्ट्रीय सम्मेलन ऑन्कोस्फेयर का रविवार को आखिरी दिन था। इसमें देशभर के ऑन्कोलॉजिस्ट, सर्जन और स्पेशलिस्ट ने कैंसर के इलाज के नवाचारों पर चर्चा की। इसमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर समेत कई सत्र हुए। डॉ. संदीप दवे ने रोबोटिक तकनीक के उपयोग, सटीकता, पेशेंट के जल्द स्वस्थ होने से जुड़े पहलू साझा किए। कैंसर नए प्रकार के साथ ही इलाज की आधुनिक तकनीक पर चर्चा की गई। कैंसर की आशंका उन्हें भी जिनके दांत नुकीले हैं, वजह- ऐसे दांत जीभ से टकराकर घाव या गांठ बनाते हैं, यही घातक; इसे चेक कराएं, दांत घिसवाकर बचाव संभव म्यूटेशन से हुए कैंसर का टारगेटेड थैरेपी से स्पेसिफिक इलाज संभव, अब लाखों की बजाय हजारों की आ रही दवाएं कैंसर में नए-नए म्यूटेशन जैसे महिलाओं के स्तन में ईआरपीआर हर्टो, फेफड़ों के कैंसर और अन्य कैंसर में कई प्रकार के नए म्यूटेशन पाए जा रहे हैं। म्यूटेशन से हुए कैंसर का स्पेसिफिक दवाइयों से इलाज हो रहा है। कैंसर के इलाज का अब नई तकनीकों से भी इलाज हो रहा है। इनमें एक है टारगेटेड थैरेपी। इसमें कैंसर के म्यूटेशन का पता लगाकर स्पेसिफिक दवाई या इंजेक्शन से पूरी तरह रोक देते हैं। वहीं इम्युनोथैरेपी में विशेष दवाओं के जरिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर काम किया जाता है। इसी तरह एक है कार्टिसेल थैरेपी। यह एक दवा है, जो मरीजों के प्लाज्मा से ही तैयार की जाती है। इसका ज्यादातर प्रयोग ब्लड कैंसर में होता है। जब थैरेपी काम नहीं आती तब मरीज को कार्टिसेल थैरेपी दी जाती है। इसके अलावा आजकल बच्चों और युवाओं में आंत के कैंसर की समस्या हो रही है। ये अनुवांशिक होता है। लेकिन खराब लाइफस्टाइल के कारण भी आंत का कैंसर होता है। प्रोसेस्ड फूड, फाइबर कंटेंट कम, ओबेसिटी, फिजिकल एक्टिविटी का कम होना प्रमुख कारण है। इससे बचने के लिए बच्चों को फल-सब्जियां और साबुत अनाज देें। उनकी आउटडोर एक्टिविटी बढ़ाएं। इसलिए विशेषज्ञों से सलाह लेते रहें। कुछ लोगों में कैंसर के एक नए प्रकार का पता चला है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं गुटखा खाती हैं। गुड़ाकू करती हैं। गुटखा और गुड़ाकू, मुंह के कैंसर की एक बड़ी वजह हैं। उन्हें भी कैंसर की आशंका बढ़ गई है जिनके नुकीले दांत जीभ से बार-बार टकराते हैं। इसके चलते घाव बन जाता है या फिर गांठ बन जाती है, जो कैंसर का रूप ले लेती है। इससे बचने के लिए विशेषज्ञों से जांच कराएं। सलाह पर नुकीले दांत घिसवाकर कैंसर की आशंका से बच सकते हैं। ब्लड कैंसर के तीन मुख्य प्रकार होते हैं, ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, और मायलोमा। बच्चों में इसका कारण अनुवांशिक होता है। रेडिएशन के एक्सपोजर से भी ब्लड कैंसर का खतरा होता है। मरीज जो लगातार सिटी स्कैन कराते हैं, उन्हें भी इसका खतरा हो सकता है। इसके अलावा केमिकल एक्सपोजर जैसे पेस्टीसाइड्स, कुछ दवाइयां, केमिकल आदि से भी खतरा है। जांच, दवाओं के खर्च में कमी: अब 5-7 हजार रु. में बायोप्सी हो रही है। पहले टारगेटेड थैरेपी 70-80 हजार में होती थी, अब 15-20 हजार में हो रही है। इम्युनोथैरेपी ट्रीटमेंट में पहले 70-80 लाख खर्च होते थे, अब 3-4 लाख ही लग रहे। टार्गेटेड दवाएं भी 2-3 हजार में मिल रही हैं।”


