गायों को छाया देने ट्रस्ट का जतन सफल…:4200 पौधे रोपकर जंगल बसाया जितने उगाए उनमें से 99% जीवित

खैरागढ़ के पास मुड़पार गांव में चल रहा मनोहर गोशाला ट्रस्ट। गायों की देशभाल के साथ गोबर, गोमूत्र से खाद बनाई जा रही है। बेसहारा, बीमार गायों के लिए काम करने वाली संस्था मनोहर गोशाला ट्रस्ट ने पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में पहल की है। उसने अपने निर्माणाधीन गोवंश अस्पताल के परिसर में 4200 पेड़ों का जंगल बसा दिया है। पांच साल से यह सिलसिला चल रहा है। खास बात यह है कि जितने पौधे लगाए गए, उनमें से 99 फीसदी जीवित हैं। आने वाले दिनों में यह एक बड़ा ऑक्सीजोन बनने जा रहा है। ट्रस्ट खैरागढ़ के पास मुड़पार गांव में सामाजिक सहयोग से एक गोशाला चलाता है। इसमें बीमार, बेसहारा छोड़ दी गईं और हादसे में घायल गोवंश की सेवा की जाती है।
गांव वाले गोशाला से गोबर खाद और गोमूत्र से बना फसल अमृत लिक्विड फर्टिलाइजर ले जाते हैं। बदले में गायों को चारा उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। इस जंगल को बसाने वाले ट्रस्ट के संस्थापक अखिल जैन (पदम डाकलिया) ने बताया कि गायों के उपचार के लिए एक बड़े अस्पताल का विचार आया। साथ ही गायों को शुद्ध हवा और छाया मिले, इसलिए परिसर में पौधे लगाने की शुरुआत की गई। ट्रस्ट के पास हाइड्रोलिक लिफ्ट वाली एक गाड़ी भी है। अस्पताल परिसर में लगाए गए ज्यादातर पौधे इसलिए जीवित हैं क्योंकि बाहर की कोई खाद, कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जाता। गोशाला में गाय के गोबर से निर्मित मनोहर गोल्ड खाद और गोमूत्र से बने लिक्विड फर्टिलाइजर फसल अमृत दिया जाता है। पौधों की देखरेख के लिए स्थायी कर्मचारी है। खुद ट्रस्टी अखिल जैन इसकी मॉनिटरिंग करते हैं। परिसर में ध्यान करने के लिए पगोडा भी बनाया जा रहा है। अखिल जैन बताते हैं कि गोबर में विकिरण को नियंत्रित करने वाले गुण होते हैं। यह ध्यान केंद्र आम लोगों के लिए उपलब्ध रहेगा। मनोहर गोशाला में गायों के गोबर और गोमूत्र से दवाएं, खाद, कीटनाशक और तरह तरह की चीजें बनाई जाती हैं।
दीपावली पर ट्रस्ट की तरफ से गोबर से बने दीए निशुल्क बांटे जाते हैं। ये विदेश तक भेजे जाते हैं। दवा के रूप में सेवन के लिए गोमूत्र को बोतलों में भरकर निशुल्क दिया जाता है। ट्रस्ट की ओर से बनाए गए लिक्विड फर्टिलाइजर फसल अमृत को इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय रायपुर के वैज्ञानिकों ने उत्पादन बढ़ाने वाला और मिट्‌टी का स्वास्थ्य सुधारने वाला पाया है। इससे उत्पादन में 12 से 22 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसे यूरिया का अच्छा विकल्प माना जा रहा है। देश के दो विश्वविद्यालयों में इस पर अभी शोध चल रहा है। भारत में इसके पेटेंट का आवेदन स्वीकृत हो चुका है। यूएसए पेटेंट भी 2021 में स्वीकृत हो चुका है। गोशाला के संस्थापक अखिल जैन (पदम डाकलिया) को छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण 2024 यति यतन लाल सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें पशु कल्याण व संरक्षण के लिए भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (एडब्ल्यूबीआई) द्वारा प्राणी मित्र पुरस्कार से भी नवाजा गया है। वे गाय एक वरदान नामक किताब लिख चुके हैं। गाय एक अनुसंधान नाम से एक और किताब तैयार कर रहे हैं। ऐसा सभी जगह हो
गोवंश के लिए यह अस्पताल एक वरदान है। इस तरह जंगल और तालाब सभी गोशालाओं में होने चाहिए। लोगों को यहां आकर हो रहा काम देखना चाहिए। गोबर व गोमूत्र से बन रहे उत्पाद सराहनीय हैं। गोशाला को एक आदर्श प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
-विशेषर सिंह पटेल, राज्य गौसेवा आयोग के अध्यक्ष

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