ऑपरेशन तमस:ट्रेन में यात्रियों से मोबाइल मांगकर गुर्गों को निर्देश देता था, पुलिस कारपेंटर बन काम मांगने पहुंची और दबोचा

जाेधपुर रेंज की साइक्लाेन टीम ने प्रदेश के टाॅप 25 में शामिल 40 हजार के आराेपी प्रकाश चाहर को गुजरात के नवसारी शहर से शनिवार को पकड़ा। आराेपी बारह साल से मादक पदार्थाें की तस्करी में लिप्त तस्करों का सरगना है। पांच माह से पुलिस आराेपी की तलाश में जुटी रही। आराेपी पुलिस से बचने के लिए माेबाइल का इस्तेमाल नहीं करता था। मुंबई लाेकल ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों का फोन इस्तेमाल कर गुर्गों को निर्देश देता और नेटवर्क चलाता था। इसी के चलते आराेपी लंबे समय से पुलिस के सर्विलांस से बचा रहा। बाड़मेर के सदर थाना इलाके के बलाऊ गांव का रहने वाला आराेपी जोधपुर, पाली, जालोर, सिराेही में अफीम-डोडा की तस्करी और सप्लाई का सरगना है। बाड़मेर जिला मुख्यालय पर पुलिस लाइन में रेंज आईजी विकास कुमार ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में बताया कि आराेपी जोधपुर, पाली, जालोर व सिराेही में अफीम-डोडा की तस्करी का सरगना है। आराेपी काे पकड़ने के लिए ऑपरेशन तमस चलाया गया। 5 माह में 1000 किमी तक पुलिस का पीछा, गुजरात, महाराष्ट्र के ठिकानों पर पहुंची टीम आराेपी 6 साल से फरार था। पुलिस ने ऑपरेशन तमस चलाकर 5 महीने में 1000 किमी तक आराेपी का पीछा किया। आरोपी गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में अलग-अलग ठिकानों पर रहकर नशे का कारोबार चला रहा था। 2 महीने पहले निंबाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) में साइक्लोन टीम ने आराेपी काे घेर लिया लेकिन वह छत से कूद बाइक से फरार हो गया। पुलिस काे आराेपी के साले से पूछताछ में मुंबई में हाेने का इनपुट मिला। शातिर बदमाश पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए खुद मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करता था। मुंबई में रहने के दौरान जब भी उसे गिराेह के सदस्याें से बात करनी होती तो वह लोकल ट्रेन में चढ़ता। इसके बाद यात्रियाें से माेबाइल मांग लेता और अपने लोगों से संपर्क कर उन्हें निर्देश देते हुए काराेबार चलाता। आराेपी काम होने के बाद लगातार ठिकाने बदल देता। पुलिस आराेपी का पीछा करते हुए मुंबई में भायंदर स्थित ठिकाने तक पहुंची लेकिन चकमा देकर फरार हो गया। आराेपी मुंबई में लाेगाें के घरों में इंटीरियर करने की आड़ में नशे का कारोबार चला रहा था। इसके खिलाफ 7 मुकदमे दर्ज हैं। लकड़ी व मार्बल का कारोबारी, नशे की लत ने बनाया सप्लायर आराेपी ने 12 साल पहले उदयपुर में एक रिश्तेदार के साथ मिलकर लकड़ी का कारोबार शुरू किया था। इसके एक साल बाद मार्बल का काम किया। इस दौरान उसे अफीम और डोडा की लत लगी। उसने नशे की तस्करी के जरिए अमीर बनने के सपने देखना शुरू किया। नशे की तस्करी में पैर जमाने के लिए 11 साल पहले उदयपुर से निंबाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) में शिफ्ट हो गया। यहां डोडा-पोस्त और अफीम इकट्ठा करने लगा और गुर्गों के जरिए मारवाड़ में सप्लाई शुरू की। धीरे-धीरे पूरे मारवाड़ में अफीम और डोडा-पाेस्त सप्लायर का सरगना बना। टीम ने 2 महीने पहले आराेपी के निंबाहेड़ा स्थित ठिकाने पर रेड डाली लेकिन छत से कूदकर बाइक से फरार हो गया था और मुंबई भाग गया। पुलिस की आराेपी के साले से पूछताछ में मुंबई हाेने का इनपुट मिला। पुलिस ने गुर्गों के फोन सर्विलांस पर रखे और भायंदर इलाके में होने का अनुमान लगा। टीम वहां 15 दिन रही, लेकिन ठिकाना नहीं मिला। जब टीम उसके ठिकाने तक पहुंची, वह भाग चुका था। मुंबई से भागकर नवसारी पहुंचा, बिल्ली मोरा इलाके से दबाेचा पुलिस काे आराेपी की लोकेशन गुजरात के नवसारी में मिली। टीम 5 दिन नवसारी में रही। टीम के जवान कारपेंटर बनकर कारखानों में नौकरी की खोज करने लगे। नवसारी की बिल्ली मोरा इलाके में एक दुकान पर लकड़ी का काम खोजते हुए पुलिसकर्मी पहुंचा तो एक कारीगर मिला। उसने पुलिसकर्मी से कहा कि तुम्हें मालिक से मिलाता हूं। कारीगर पुलिसकर्मी को लेकर चाहर के पास पहुंचा और बताया कि यही हमारे मालिक हैं और काम दे सकते हैं। पुलिसकर्मी ने आराेपी से बात की और टीम को सूचना दी। नवसारी पुलिस की मदद से इलाके की घेराबंदी कर चाहर को दबाेचा गया।

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