कोटपूतली-बहरोड़ जिले में खेत में गड्ढा खोदकर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) की पाइपलाइन से क्रूड ऑयल चुराया जा रहा था। ऑयल चुराने वाली गैंग का कोई बदमाश अब तक एसओजी के हाथ नहीं लगा है। भास्कर ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की, जिसमें कई हैरान कर देने वाली बातें सामने आईं… पढ़िए पूरी रिपोर्ट… किसी को शक न हो, इसलिए पुलिसवाले के परिवार का खेत किराए पर लिया गैंग ने ऑयल चोरी करने के लिए लंबी प्लानिंग की थी। पहले शाहजहांपुर और नीमराना के आस-पास कई खाली प्लॉट और खेत देखे। इसके बाद एक हेड कॉन्स्टेबल के परिवार का खेत किराए पर लिया, ताकि किसी को शक न हो। हेड कॉन्स्टेबल फिलहाल पावटा में हैं। बदमाशों ने 1 बीघा जमीन को कबाड़ का काम करने के नाम पर किराए पर लिया। खेत में आधा बीघा एरिया में सीमेंट के दस-दस फीट के ब्लॉक बनाकर दीवार खड़ी कर दी ताकि कोई अंदर देख न सके। इसके बाद दो कमरे बनाए। एक कमरे में सीसीटीवी कैमरों से मॉनिटरिंग के लिए एलईडी लगाई। दूसरे कमरे में रेट माइनिंग तकनीक (मशीनों के बजाय हाथ और फावड़े से खुदाई) से सुरंग खोदने का काम शुरू किया। खेत से आईओसीएल पाइपलाइन की दूरी तकरीबन सौ मीटर की है। सुरंग के अंदर से मिट्टी निकालने के लिए हाथ-ट्रॉली का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने यह ट्रॉली भी बरामद कर ली है। डेढ़ से दो महीने में बनाई सुरंग शाहजहांपुर पुलिस सूत्रों के अनुसार बदमाशों को सुरंग बनाने में करीब डेढ़ से दो महीने का समय लगा। बदमाशों ने आईओसीएल की पाइप लाइन के नीचे की तरफ ड्रिल किया और यहां पर वाल्व लगाया। इसके बाद दो इंच के पाइप से इसे जोड़कर कमरे में किए गड्ढे तक लाया गया। यहां भी दो वाल्व लगाकर पाइप जोड़कर कमरे से बाहर निकाला और क्रूड ऑयल चोरी कर रहे थे। आईओसीएल से जुडे़ सूत्रों के अनुसार वाल्व और ड्रील करने का काम बदमाशों ने बाहर से आदमी बुलाकर किया। ड्रीलिंग करने में करीब दस से बारह दिन का समय लगता है, क्योंकि पाइप लाइन में ऑयल का प्रेशर काफी ज्यादा होता है, ऐसे में जरा सी चूक से विस्फोट हो सकता है। बदमाशों ने पाइपलाइन के नीचे भी इसलिए ड्रिल किया कि अगर कंपनी के कर्मचारियों को शक भी हो और ऊपर से खुदाई कर चेक भी किया जाए तो लाइन में ड्रिल के बारे में जानकारी न लग सके। 100 मीटर लंबी सुरंग के अंदर भी बदमाशों ने कैमरे लगाए थे। यही नहीं पूरे खेत के चारों तरफ सीसीटीवी लगा रखे थे। खेत में एक पेड़ पर भी सीसीटीवी लगा रखा था, ताकि कोई भी आवाजाही हो तो तुरंत जानकारी मिल सके। अंदर मजदूर खुदाई करते थे, उस दौरान बदमाश उनसे संपर्क में रहने के लिए वॉकी टॉकी का इस्तेमाल किया करते थे। मेन गेट के सामने कबाड़ का ढेर, ताकि किसी को शक न हो बदमाशों ने आधा बीघा खेत में बाउंड्री करवाकर मेन गेट लगवा दिया था। बदमाशों ने गेट के बिल्कुल सामने दीवार की तरफ कबाड़ भरकर रख दिया, ताकि अगर कोई अंदर झांक कर भी देखे तो कबाड़ नजर आए और शक न हो। पाइप लाइन से 10 कदम की दूरी पर एक कबाड़ का गोदाम है, जहां स्क्रैप काटने का काम होता है। गोदाम पर जब भास्कर टीम पहुंची तो वहां कृष्ण कुमार मिले। कृष्ण कुमार से जब इस बारे में जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि यहां दिन में सिक्योरिटी गार्ड लाइन की निगरानी करने आते हैं। उन्हें भी इसके बारे में कोई जानकारी नहीं लग सकी तो दूसरे लोगों को कैसे लगती। कृष्ण कुमार ने बताया- खेत पुलिसकर्मी के परिवार का है, ऐसे में किसी ने शक भी नही किया कि यहां ऐसा काम हो सकता है। गोदाम के लिए अर्जुन के नाम से रेंट एग्रीमेंट बनवाया, फिर चेंज करवाया बदमाशों ने सुरंग तैयार होने और पाइपलाइन में ड्रिल-कनेक्शन करने के बाद खेत से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर नीमराना रोड पर एक प्लॉट किराए पर लिया। इसका रेंट एग्रीमेंट अर्जुन नाम से तैयार करवाया गया था। यह प्लॉट सत्यवीर सिंह का है। सत्यवीर सिंह ने बताया- 20 नवंबर 2024 को उनके पास कॉल आया था। कॉल करने वाले ने अपना नाम अर्जुन बताया और प्लॉट किराए पर लेने की बात कही। 1 दिसंबर को सत्यवीर नीमराना पहुंचे और खुद को अर्जुन बताने वाले युवक से मुलाकात की। सत्यवीर ने बताया- अर्जुन ने उससे कहा कि वह यहां गाड़ियों में काम आने वाला कूलेंट बनाने का काम करेगा। बीस हजार रुपए महीने किराए में बातचीत तय हुई। इसके बाद अर्जुन के नाम से 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनाया। उन्होंने बताया- 3 जनवरी 2025 को अर्जुन ने फिर कॉल किया और कहा कि कूलेंट बनाने के लिए लाइसेंस लेना पड़ता है। अर्जुन नाम से रेंट एग्रीमेंट में लाइसेंस बनाने में दिक्कत आ रही है, इसलिए बलवीर नाम से रेंट एग्रीमेंट बनाना है। मैंने इसके लिए हामी भर दी तो अर्जुन ने कहा कि आते समय 5 किलो देशी घी भी लेकर आना। सत्यवीर ने बताया- मैं नीमराना में जैसे ही प्लॉट के गेट पर पहुंचा तो बदमाश ने सीसीटीवी कैमरे में उसे देख लिया। उसने अपने एक साथी को वहां भेजा, जिसने घी लिया। करीब दो-तीन घंटे बाद वह आया और रेंट एग्रीमेंट चेंज करवाया। सत्यवीर के अनुसार 8 जनवरी को आईओसीएल के कर्मचारियों ने फोन कर बुलाया तब मामले का पता लगा। डेढ़ लाख लीटर का स्टोरेज, एक और सुरंग की थी तैयारी सत्यवीर का प्लॉट पहले गाड़ियों के सर्विस स्टेशन के लिए किराए पर दिया हुआ था। करीब डेढ़ साल से ये खाली पड़ा था। बदमाशों ने सबसे पहले पानी का जो टैंक था, उसे पैक करवाया। उसमें से दो पाइप निकाले, जिनसे स्टोर ऑयल टैंकर में भरा जा सके। टैंकर 70 हजार लीटर का था। बदमाशों ने 35-35 हजार लीटर के 2 पार्टिशन किए हुए थे। एक पूरा क्रूड ऑयल से भरा था तो दूसरा आधा भरा हुआ था। इसके साथ ही एक परमानेंट स्टोरेज भी बदमाश तैयार कर रहे थे। लोहे का ये स्टोरेज डेढ़ लाख लीटर का था। इसे लोहे और स्टील की चादर और एंगल से तैयार कर रहे थे। इसे बनाकर बदमाश अंडरग्राउंड फिट करना चाहते थे ताकि यहां पर बड़ा स्टोरेज किया जा सके। गोदाम में ही स्टोरेज के साथ-साथ बदमाश एक और सुरंग बनाने की तैयारी में थे। आईओसीएल के अधिकारी भी इस बात को मान रहे हैं। दरअसल, इस गोदाम के पीछे से भी आईओसीएल की पाइप लाइन गुजर रही है। ऐसे में बदमाश डेढ़ लाख लीटर का स्टोरेज तैयार कर यहां पर सुरंग बनाकर पाइपलाइन में ड्रिल कर सीधा ऑयल इस बड़े टैंक में स्टोर करना चाहते थे। इसी मकसद से ये प्लॉट किराए पर लेकर गोदाम बनाया। आईओसीएल के जीएम सिक्योरिटी राजेश कुमार ने बताया कि गोदाम में भी टीम ने खुदाई कर चेक किया है कि बदमाशों ने अभी लाइन के साथ छेड़छाड़ की या नहीं, हालांकि यहां अभी तक ऐसी बात नहीं मिली। स्क्रैप का बड़ा काम, इसलिए गैंग के निशाने पर एरिया इस रूट पर आईओसीएल और एचपीसीएल दोनों की लाइन है। शाहजहांपुर इलाके में पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। बदमाशों के लिए यह जगह मुफीद इसलिए है, क्योंकि यहां पर स्क्रैप का बड़ा काम होता है। यहां पर इंडस्ट्रियल एरिया होने की वजह से बड़ी मात्रा में स्क्रैप निकलता है। ऐसे में स्क्रैप की आड़ में बदमाश ऑयल चोरी का काम करते हैं ताकि किसी को शक न हो। क्रूड ऑयल चोरी में दो गैंग मुख्य तौर पर काम करती है। आईओसीएल की ही लाइन निशाने पर क्यों यहां से आईओसीएल की 3 लाइन गुजरती हैं। 20 हजार किलोमीटर लंबी लाइनें हैं। इसके अलावा सिक्योरिटी सिस्टम कमजोर है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बदमाशों ने ऑयल चोरी करना शुरू कर दिया, लेकिन अलार्म सिस्टम के बावजूद किसी को भनक नहीं लगी। हालांकि आईओसीएल जीएम सिक्योरिटी राजेश कुमार का दावा है कि बदमाशों को समय रहते ही रोक लिया गया। उन्होंने बताया कि जैसे ही पाइपलाइन में प्रेशर कम होने की जानकारी मिली अलार्म सिस्टम एक्टिव हो गया। एरिया पता चलने के बाद हमने जानकारी जुटाई और खेत तक पहुंच गए थे। वहीं एसओजी डीएसपी शिवकुमार ने बताया कि अभी मामले की जांच की जा रही है। गैंग तक अभी नहीं पहुंचे हैं। संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है।


