ओंकारेश्वर में प्रोटोकॉल दर्शन बंद, अब लगेंगे 300 रुपए:ट्रस्टी का डिप्टी कलेक्टर पर आरोप- होटल वालों से मिलीभगत कर VIP दर्शन करा रहे

क्रिसमस और न्यू ईयर की छुट्टियों के चलते तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। ज्योतिर्लिंग दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हैं और इंदौर मार्ग के मोरटक्का पुल तक वाहनों की कतारों से बार-बार जाम लग रहा है। भारी भीड़ को देखते हुए खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने फैसला लिया है कि अगले एक हफ्ते तक प्रोटोकॉल दर्शन व्यवस्था बंद रहेगी। अब प्रोटोकॉल वालों को भी 300 रुपए का चार्ज देना होगा। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि जो लोग प्रोटोकॉल के तहत दर्शन के लिए आते हैं, उन्हें भी अब 300 रुपए प्रति श्रद्धालु चुकाने होंगे। वे शुल्क देकर ही वीआईपी दर्शन कर पाएंगे। प्रोटोकॉल व्यवस्था को 5 जनवरी के बाद श्रद्धालुओं की संख्या का रिव्यू करने के बाद ही बहाल किया जाएगा। ट्रस्टी ने लापरवाह कर्मचारियों को हटाया इधर, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के नए प्रबंधक ट्रस्टी राव पुष्पेंद्र सिंह ने व्यवस्थाओं में बदलाव शुरू कर दिया है। वे कार्य में लापरवाही बरतने वाले कई कर्मचारियों को हटा चुके हैं। भीड़ बढ़ने से वीआईपी दर्शन के नाम पर ठगी करने वाले सक्रिय हो गए हैं, जिन्हें ट्रस्टी खुद पकड़ रहे हैं। डिप्टी कलेक्टर के नाम की पर्ची मिली इसी दौरान ट्रस्टी को एक बाहरी श्रद्धालु के पास पर्ची मिली, जिस पर डिप्टी कलेक्टर मुकेश काशिव का नाम लिखा था। राव पुष्पेंद्र सिंह ने पूछताछ की तो श्रद्धालु ने बताया कि वह ग्रैंड ओंकारा होटल में रुका था। होटल संचालक ने ही उन्हें यह पर्ची दी थी और कहा था कि मंदिर में प्रोटोकॉल के तहत दर्शन हो जाएंगे। साथ ही होटल से एक पुलिसकर्मी भी उनके साथ मंदिर तक जाएगा। यह सुनकर राव पुष्पेंद्र सिंह हैरान रह गए। होटल वालों से सांठगांठ का आरोप भास्कर से बातचीत में राव पुष्पेंद्र सिंह ने बताया, “मंदिर में दर्शन व्यवस्था के लिए जिला प्रशासन ने जिस डिप्टी कलेक्टर को यहां का प्रभारी बनाया है, वे होटल वालों से सांठगांठ कर रहे है। मैंने पता किया तो जानकारी मिली कि होटल वाले अपने ग्राहकों से प्रोटोकॉल के नाम पर मोटी राशि वसूल करते है। वहां से एक पर्ची बनाकर उन्हें देते है और बकायदा पुलिसकर्मी के साथ मंदिर भिजवाते है। पर्ची पर मुकेश काशिव डिप्टी कलेक्टर लिखा रहता है, जिसके चलते उन श्रद्वालुओं को मंदिर का कोई कर्मचारी नहीं रोक पाता हैं।”

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