सख्त कमिश्नरी सिस्टम बनाने पहली बार बैठी कमेटी, आधा दर्जन राज्यों का अध्ययन रायपुर में नवंबर से कमिश्नरी प्रणाली लागू होने की पूरी संभावना है। इसके लिए सरकार की ओर से एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में गठित 8 सदस्यीय कमेटी की शनिवार को पहली बैठक हुई। सिविल लाइन स्थित सी-4 में यह बैठक चार घंटे तक चली। इसमें महाराष्ट्र, दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद, ओडिशा, राजस्थान और मध्यप्रदेश के पुलिस एक्ट पर चर्चा हुई। इन राज्यों में कमिश्नर को क्या-क्या अधिकार है, किस तरह की व्यवस्था है। इसकी समीक्षा की जा रही है। कमिश्नरेट सिस्टम में कितने पद, किस रैंक के अधिकारी होते हैं, पुलिस कोर्ट की क्या व्यवस्था हैं। कितना फोर्स होता है। सभी के अध्ययन के बाद रायपुर में लागू होने वाले पुलिस कमिश्नरेट का खाका तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। बैठक में आईजी अजय यादव, ध्रुव गुप्ता, डीआईजी अभिषेक मीणा, संतोष सिंह और एसपी प्रभात कुमार मौजूद थे। संभागीय आयुक्त या आईजी ऑफिस में होगा सीपी का दफ्तर: रायपुर में संभागीय आयुक्त या आईजी ऑफिस को पुलिस कमिश्नर दफ्तर बनाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। पुराना पुलिस मुख्यालय को भी विकल्प के तौर पर रखा गया है। कलेक्टोरेट में एडिशनल सीपी और गंज थाना परिसर में ज्वाइंट सीपी का दफ्तर होगा। सिविल लाइन, टिकरापारा और नवा रायपुर में आईपीएस रैंक के अधिकारी बैंठेगे। रायपुर में जल्द लागू होगा कमिश्नरी सिस्टम: अब पुलिस होगी और शक्तिशाली
ओडिशा का सिस्टम हो सकता है लागू क्योंकि वहां मॉडर्न एक्ट से पुलिसिंग रायपुर में इस साल हर हाल में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो जाएगा। ऐसा करने वाला छत्तीसगढ़ देश का 18वां राज्य होगा। इससे पहले मध्यप्रदेश के दो शहरों में यह सिस्टम लागू किया गया था। देश के 72 शहरों में पहले से ही यह व्यवस्था लागू है, रायपुर देश का 73वां शहर बनेगा। हालांकि छत्तीसगढ़ में दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में भी पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव था, लेकिन मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त को केवल रायपुर में इसे लागू करने की घोषणा की। कमिश्नरी सिस्टम कैसा होगा, इसका खाका अभी तैयार नहीं है। मजबूत कमिश्नरी सिस्टम लागू करने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि ओडिशा भुवनेश्वर का कमिश्नरी सिस्टम यहां लागू हो सकता है, क्योंकि वहां मॉडर्न पुलिस एक्ट से पुलिसिंग चल रही है। मध्यप्रदेश में जो व्यवस्था लागू की गई है, वह केवल नाममात्र की है। अधिकांश अधिकार अब भी कलेक्टर के पास हैं। कमिश्नर केवल एसएसपी जैसी भूमिका निभा रहा है। नाम बदल गया, लेकिन अधिकार नहीं। इसलिए रायपुर में मुंबई, ओडिशा और दिल्ली की तरह सशक्त सिस्टम लाने की तैयारी है। इसमें खास तौर पर एनएसए, सार्वजनिक उपद्रव को रोकने धारा 133 और गिरफ्तारी के लिए धारा 145 के अधिकार पुलिस कमिश्नर को दिए जाएंगे। इन राज्यों के सिस्टम को देखा ये अधिकार मिलेंगे अब पुलिस को ये अधिकार अभी कलेक्टर के पास भास्कर एक्सपर्ट – अन्वेष मंगलम, रिटायर्ड स्पेशल डीजी पुलिस के पास ही रहे पॉवर
रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जा रहा है। यह सिस्टम दिल्ली, मुंबई या ओडिशा जैसा होना चाहिए क्योंकि इन राज्यों में सबसे मजबूत व्यवस्था है। यहां पुलिस के पास पूर्ण अधिकार हैं और कलेक्टर केवल विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का काम करता है। पुलिस को दंडाधिकारी के अधिकार मिलने चाहिए। इंदौर और भोपाल में लागू कमिश्नरी सिर्फ नाम की है। रायपुर में स्टेट कैपिटल रीजन लागू होने वाला है। इससे निवेश बढ़ेगा और इसकी पहली शर्त है मजबूत कानून-व्यवस्था। जहां कानून मजबूत होता है, वहां निवेश बढ़ता है। मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए सख्त पुलिस व्यवस्था जरूरी है। नए अपराधों की रोकथाम के लिए अलग तरह की कार्रवाई की आवश्यकता है और पुलिस कमिश्नर सिस्टम यह काम करेगा। हर अपराध पर बेहतर कोआर्डिनेशन होगा।


