भास्कर न्यूज | प्रतापपुर घोरीघाट प्रखंड के मथुरापुर में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर तीन साल से बनकर तैयार है, लेकिन क्षेत्र में भीषण पेयजल संकट के कारण मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा अब तक नहीं हो सकी है। घोरीघाट, मथुरापुर सहित आसपास के इलाकों में जलस्तर अत्यधिक नीचे चले जाने से लोगों को सालभर पानी की परेशानी झेलनी पड़ती है। स्थानीय लोगों के अनुसार 200 से 500 फीट गहराई तक बोरिंग कराने के बाद भी गर्मी के दिनों में पानी की भारी किल्लत हो जाती है। क्षेत्र में लगाए गए चापाकल और जलमीनार भी अधिकतर समय फेल हो जाते हैं। घोरीघाट तीन ओर पठारी और बंजर भूमि से घिरा है तथा एक ओर मोरहर नदी बहती है। पठारी भू-संरचना के कारण यहां भूजल स्तर काफी नीचे है, जिससे स्थायी जल संकट बना रहता है। उड़ीसा के मंदिरों की तर्ज पर बने नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण घोरीघाट निवासी समाजसेवी संतोष कुमार ने अपने माता-पिता की स्मृति में कराया है। उड़ीसा के कारीगरों की शिल्पकला से सजे इस भव्य मंदिर को देखने के लिए भविष्य में झारखंड और बिहार से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। समाजसेवी संतोष कुमार ने बताया कि मंदिर पूरी तरह तैयार है, लेकिन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए पर्याप्त पानी की व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने राज्य सरकार और चतरा उपायुक्त से घोरीघाट में बड़ी पानी टंकी का निर्माण कर नियमित जलापूर्ति शुरू करने की मांग की है। वहीं मुखिया श्रीमती रीना देवी के प्रतिनिधि एवं भाजपा नेता प्रेम कुमार ने भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जिला प्रशासन, सांसद, विधायक तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से इस दिशा में शीघ्र पहल करने की अपील की है। उनका कहना है कि बड़ी सप्लाई पानी टंकी लगने से पूरे क्षेत्र को समुचित जल उपलब्ध होगा और मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का मार्ग भी प्रशस्त होगा। इस मांग का समर्थन करने वालों में विक्की गुप्ता, रंजन पासवान, पंचायत समिति सदस्य राजन कुमार, बिनोद पाठक, भोला कुमार, अनिस हसन, बिलास जी, उज्ज्वल गुप्ता, मो. जावेद, कारू चौधरी, मंदीप, सुरेंद्र कुमार, अनुप, मुकेश, शाहजहां सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल हैं।


