ओबीसी आयोग की जनसुनवाई में उठी मांग,:जनसंख्या के अनुपात में मिले पंचायत व निकाय आरक्षण, सूचना केंद्र में हुआ जन संवाद कार्यक्रम

राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग द्वारा सोमवार को झुंझुनूं के सूचना केंद्र सभागार में एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई और जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले के ओबीसी वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक हालातों का जायजा लेना और उनके सुधार के लिए जनप्रतिनिधियों व आमजन से सुझाव प्राप्त करना था। कार्यक्रम में ओबीसी आयोग के सदस्य गोपाल कृष्ण शर्मा और पवन मावंडिया मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने क्षेत्र के विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों से मुलाकात कर उनके सुझावों को सुना। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैलाश यादव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का समन्वय किया। संतोष सैनी ने मजबूती से रखा पक्ष ओबीसी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष संतोष सैनी ने वर्ग के उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे। उन्होंने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का हवाला देते हुए कहा कि “प्रतिष्ठा और अवसर की समानता” तभी संभव है जब ओबीसी वर्ग को उनके हक के अनुसार प्रतिनिधित्व मिले। मुख्य मांगें पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी वर्ग को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए। राजस्थान में ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की मांग की गई। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा अति पिछड़ी जातियों के लिए घोषित 6 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मूल ओबीसी वर्ग का उचित वर्गीकरण हो ताकि उन जातियों को भी लाभ मिल सके जो अब तक पिछड़ी हुई हैं। जिन ओबीसी जातियों को अब तक राजनीति में पर्याप्त अवसर नहीं मिले हैं, उनके लिए विशेष प्रावधान किए जाएं। ये रहे मौजूद इस अवसर पर ओबीसी समाज के कई प्रमुख लोग और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें उप प्रधान विपिन नुनिया, राजेश गोदारा, अखिल सेन, मुकेश कुमार और नरेंद्र सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और अपनी बात रखी। ओबीसी आरक्षण वर्गीकरण और 27% कोटे की मांग: माली सैनी समाज ने आयोग को सौंपा ज्ञापन माली सैनी समाज संस्था, झुंझुनूं ने राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग को ज्ञापन सौंपकर राजस्थान में ओबीसी आरक्षण को 21% से बढ़ाकर 27% करने और इसका वैज्ञानिक वर्गीकरण करने की मांग की है। मुख्य मांगें आरक्षण में वृद्धि: केंद्र की तर्ज पर राज्य में भी ओबीसी आरक्षण 27% किया जाए। वर्गीकरण की आवश्यकता: संस्था के जिलाध्यक्ष महेन्द्र शास्त्री ने बताया कि ओबीसी वर्ग की कुछ सशक्त जातियों के कारण मूल ओबीसी जातियों को उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। सामाजिक न्याय के लिए वर्गीकरण अनिवार्य है। राजनीतिक प्रतिनिधित्व: झुंझुनूं में 50% मूल ओबीसी और 12% माली सैनी समाज की जनसंख्या होने के बावजूद राजनीतिक प्रतिनिधित्व नगण्य है। संस्था के मंत्री रतनलाल सैनी सहित अन्य पदाधिकारियों ने आयोग से आग्रह किया कि मूल ओबीसी जातियों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सकारात्मक अभिशंसा की जाए। इस दौरान बाघसिंह तोमर, सुरेन्द्र सैनी और बुधराम सैनी सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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