करहाल में सोमवार को ओबीसी महासभा ने विरोध प्रदर्शन किया और दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। एक ज्ञापन में स्वामी आनंद स्वरूप पर सोशल मीडिया पर अशोभनीय टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई। दूसरे ज्ञापन में 13 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण बहाल करने और जातिगत जनगणना कराने की मांग उठाई गई। ओबीसी महासभा के कार्यकारी युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष रामेश्वर यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ता ‘जय जवान, जय किसान, जय ओबीसी, जय संविधान’ के नारे लगाते हुए थाना करहाल पहुंचे। उन्होंने थाना प्रभारी को सौंपे ज्ञापन में बताया कि 2 अक्टूबर को स्वामी आनंद स्वरूप ने ट्विटर और फेसबुक पर ओबीसी वर्ग तथा उसके नेताओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए एक वीडियो साझा किया था। महासभा ने इसे समाज में वर्ग संघर्ष और वैमनस्य फैलाने का प्रयास बताया। महासभा ने मांग की है कि आरोपी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए, अन्यथा संगठन प्रदेशभर में उग्र आंदोलन करेगा।इसके बाद महासभा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता तहसील कार्यालय पहुंचे और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए इस ज्ञापन में ओबीसी वर्ग के 13 प्रतिशत होल्ड आरक्षण को बहाल करने, आगामी जनगणना में ओबीसी की जातिगत गणना कराने, ओबीसी आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने और सरकारी विभागों में लंबित बैकलॉग पदों को शीघ्र भरने जैसी प्रमुख मांगें शामिल थीं। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और निजी क्षेत्रों में ओबीसी को उनकी जनसंख्या अनुपात के अनुसार प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसके अतिरिक्त, स्वामीनाथन आयोग की अनुशंसाएं लागू करने और ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति की आय सीमा 8 लाख से बढ़ाकर 12 लाख करने की मांग भी की गई। महासभा ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने इन मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो संगठन मध्यप्रदेश भर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान ओबीसी महासभा के कार्यकर्ता, पदाधिकारी और समाजजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे।


