ओरमांझी में करैत और मांडर, चान्हो व बुंडू में नाग का खौफ सबसे ज्यादा

बारिश शुरू होते ही राजधानी के अगल-अलग इलाकों से सांप डसने के बाद मरीज रिम्स पहुंच रहे हैं। पिछले करीब 15 दिनों से हर दिन 5 से 7 पीड़ित स्नेक बाइट के बाद इलाज के लिए रिम्स में भर्ती हो रहे हैं। हालांकि, साल 2025 में आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सर्पदंश से किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन 2024 में करीब 42 लोगों की मौत सांप डसने और इलाज में देरी के कारण हुई है। दैनिक भास्कर ने राजधानी में सांप पकड़ने वाले सर्प-मित्रों से जाना झारखंड में कितने प्रजाति के सांप मिलते हैं, इनमें से कौन से सांप जहरीले हैं? और रांची के किन-किन इलाकों में ज्यादा सांप निकलने के मामले आते हैं? स्नैक एक्सपर्ट एंड वाइल्ड लाइफ संरक्षणवादी सह ओरमांझी जू के कंसल्टेंट रमेश कुमार महतो और नामकुम के राजा उलातू के रहने वाले सर्पमित्र सुखेन्द्र खंडित के अनुसार, झारखंड में कुल 30-31 तरह के सांप पाए जाते हैं। इनमें 6-7 सांप ही जहरीले हैं। रमेश ने बताया कि ओरमांझी में करैत सांप सबसे अधिक पाए जाते हैं। नाग की भी कुछ प्रजातियां पूरे रांची में पाई जाती हैं। बरसात में सावधानी जरूरी है। सांप डसे तो ओझा के पास नहीं, अस्पताल जाइए रिम्स क्रिटिकल केयर विभाग के हेड डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य ने बताया कि सर्पदंश के 70% मामले गैर जहरीले सांपों के होते हैं। इसलिए सांप कांटे तो ओझा-गुणी के चक्कर में न पड़ें। सीधे अस्पताल जाएं। एक मरीज को 10 से 20 डोज लगानी पड़ सकती है रिम्स के मेडिसिन विभाग के यूनिट इंचार्ज डॉ. संजय सिंह ने कहा- रिम्स में रोजाना औसतन सर्पदंश के तीन-चार मरीज आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक मरीज को कम से कम 10 और ज्यादा से ज्यादा 20 एंटीवेनम डोज की जरूरत होती है। ओरमांझी में सर्प दंश सबसे अधिक सर्प-मित्र सुखेन्द्र खंडित ने बताया कि रांची में सबसे ज्यादा सांप ओरमांझी में निकलते हैं। ओरमांझी में ही अक्सर विलुप्त हो चुके करैत (तक्षक नाग) देखने को मिलते हैं। वहीं, हॉस्पिटल रिकॉर्ड्स में भी ओरमांझी प्रखंड सर्पदंश के मामले में पहले स्थान पर है। 2024 में केवल ओरमांझी से 150 से ज्यादा मरीज सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचे थे। चान्हो व मांडर दूसरे स्थान पर हैं। रांची में बड़ा व छोटा घाघरा, हुंडरू व हेथू गांव, बुंडू व तैमारा, उलीडीह, पलांडू बस्ती से सांप काटने के बाद सबसे ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हुए थे। सांप डसे तो राजधानी में उपलब्ध है पर्याप्त एंटीवेनम… सांप डंस ले तो अस्पताल में भर्ती होकर स्नैक एंटीवेनम का डोज लगवाना अनिवार्य है। जिला आईडीएसपी सेल के अनुसार, रांची के जिला अस्पताल व सीएचसी आदि को मिलाकर अभी 1500 के करीब एंटीवेनम के डोज उपलब्ध हैं। रमेश कुमार। रांची में 31 तरह के सांप पाए जाते हैं, इनमें 6-7 ही जहरीले {ये सांप नहीं होते जहरीले… धामन, होरहोरा, वाटर स्नैक, सैनबुआ, रेसर स्नैक, तस्कर सांप और घर के आसपास निकलने वाले कॉमन कुकड़ी, बैंडेड कुकड़ी, रसल कुकड़ी, वूल्फ स्नैक व अन्य। {ये हैं हल्के जहरीले सांप… कॉमन कैट स्नैक, फ्रोस्टेन कैट स्नैक, तक्षक नाग, रैंबो स्नैक, इसके अलावा वाइन स्नैक में ग्रीन वाइन स्नैक और ब्राउन वाइन स्नैक शामिल हैं। {ये हैं रांची के जहरीले सांप… स्पैक्टेकल कोबरा, ब्लैक कोबरा, किंग कोबरा, करैत के दो प्रजाति कॉमन करैत व बैंडेड करैत, इसके अलावा वाइपर में रसेल वाइपर, ग्रीन​िपट वाइपर और बंबू​िपट वाइपर। सर्पमित्र सुखेंद्र खंडित।

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