ओरमा-नेवारीकला के बीच तांदुला नदी में 17.70 करोड़ की लागत से बनेगा एनीकट

भास्कर न्यूज | बालोद जिला मुख्यालय से 6 किलोमीटर दूर ग्राम नेवारीकला व ओरमा के बीच तांदुला नदी में 17.70 करोड़ रुपए की लागत से एनीकट सह रपटा पुल निर्माण कार्य कराने शासन ने मंजूरी देकर बजट में 17.70 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसके पहले मूल बजट 2023-24 में भी पुल और एनीकट निर्माण को बजट में शामिल किया था। जिसके बाद 2026-27 के में बजट में एनीकट निर्माण कार्य को शामिल किया गया है। फिलहाल 3 साल से लोगों को राहत दिलाने के लिए बना प्लान फाइल में ही कैद है। बजट में शामिल होने के बाद यह काम किसकी निगरानी में होगा। इस संबंध में सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी व जनपद पंचायत के अफसर खामोश हैं। पुल निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग व एनीकट के लिए सिंचाई विभाग की आेर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। जब सर्वे हुआ था, तब जनपद पंचायत के अधिकारी भी शामिल हुए थे। 2023-24 के बजट में दो काम शामिल होने के बाद संजारी बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने लोक निर्माण विभाग रायपुर के सचिव को पत्र भेजकर नेवारीकला-ओरमा- बालोद मार्ग में तांदुला नदी पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण कार्य को निरस्त कर एनीकट सह रपटा पुल निर्माण कराने की मांग किया था। इस वजह से एनीकट बनाने को लेकर पत्र भेजा विधायक ने पत्र भेजकर सचिव को जानकारी दी थी कि एक ही कार्य दोनों विभाग के बजट में प्रावधानित है। चूंकि नेवारीकला में एनीकट सह रपटा पुल निर्माण का महत्व एवं उपयोगिता अधिक है इसलिए लोक निर्माण विभाग द्वारा बजट में प्रावधानित उच्च स्तरीय पुल निर्माण कार्य को निरस्त करने की आवश्यकता है। हालांकि पत्र भेजने के एक साल बाद अब बजट मंे एनीकट बनाने शासन स्तर से सहमति दी गई है लेकिन काम कब से शुरु होगा स्पष्ट नहीं है। प्रशासकीय स्वीकृति कराने के लिए डीपीआर (डिटेल्स प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार किया जाएगा। पानी स्टोरेज करने प्रस्ताव भेजा गया सिंचाई विभाग की ओर से तांदुला नदी में एनीकट बनाने की प्लानिंग पहल से है ताकि आवागमन के अलावा पानी स्टोरेज भी हो सकें। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था। जिसके बाद बजट मंे शामिल किया गया। अब दोबारा बजट में शामिल किया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि शासन से प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद काम शुरु होगा। ग्राम पंचायत नेवारीकला सरपंच डिलेश्वरी हेमराज सोनकर व ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनें या एनीकट, आने-जाने में सहूलियत होनी चाहिए। सुशासन तिहार समाधान शिविर में भी पंचायत स्तर पर आवेदन दिए थे। बाढ़ में बह जाता है अस्थाई मार्ग तांदुला नदी में हर साल बारिश के पानी में बहाव में ग्राम पंचायत व ग्रामीणों से तैयार अस्थाई मार्ग बह जाता है। जिससे आवाजाही बंद हो जाती है। लोगों को मजबूरी में दुर्ग मुख्य मार्ग के जरिए जिला मुख्यालय बालोद आना-जाना करना पड़ता है। हर साल पंचायत के सहयोग से ग्रामीण तांदुला नदी पर अस्थाई मार्ग रपटा पुल का निर्माण करते है। जुलाई माह के पहले व दूसरे सप्ताह में ज्यादा बारिश होने से पानी के बहाव में बह जाता है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ग्रामीणों के सहयोग से पंचायत स्तर पर लगभग 200 मीटर अस्थाई मार्ग बनाते है ताकि आने-जाने में सहुलियत हो सकें।

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