साइंस कॉलेज के पास से हटाई गई चौपाटी महीनेभर बाद भी आबाद नहीं हो पाई। ओवरब्रिज के नीचे दुकानें तो शिफ्ट कर दी गई। स्मार्ट सिटी ने बिजली और पानी जैसी सुविधाएं भी मुहैया करा दी, लेकिन अब तक यहां से गैरेज और झुग्गी झोपड़ी को शिफ्ट नहीं किया गया है। यही कारण है कि व्यापारी अपना कारोबार शुरू नहीं कर पा रहे हैं। व्यापारी जब भी निगम के अधिकारियों से मिलने जाते हैं तो उन्हें कह दिया जाता है कि हमने चौपाटी एजेंसी को दी है, इसलिए हम आपसे बात नहीं कर सकते। ऐसे में चौपाटी में दुकान लगाने वाले 60 व्यापारी पिछले एक महीने से परेशान हैं।
दरअसल, 22 नवंबर की सुबह साइंस कॉलेज के सामने से चौपाटी को आमानाका ओवरब्रिज के नीचे शिफ्ट कर दिया गया था। निगम ने चौपाटी शिफ्ट करने के साथ ही दावा किया था कि सप्ताहभर के भीतर जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी ओर चौपाटी शुरू कर ली जाएगी। लेकिन एक महीने बाद भी चौपाटी शुरू नहीं हो पाई है। आज तक 60 दुकानदार अपने व्यापार और भविष्य को लेकर चिंतित हैं। बिजली, पानी तो दिया, लेकिन सड़क और शौचालय नहीं
निगम ने चौपाटी शुरू करने के लिए बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तो दे दी है, लेकिन यहां सड़क और शौचालय की व्यवस्था नहीं है। आमानाका ब्रिज के पास से पीडब्लूडी द्वारा बनाई जा रही सड़क भी पूरी नहीं बन पाई है। इसके चलते यहां से गुजरने वाले वाहनों से दिनभर धूल उड़ती है। इसी तरह चौपाटी के पास बने शौचालय की हालत बहुत जर्जर है। गंदगी के साथ ही यहां नल सहित अन्य सामाग्री टूट चुकी है। समझौते में झुग्गी व गैरेज हटाने की बात
बता दें कि चौपाटी संचालन के लिए गुरू हरकिशन होटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ स्मार्ट सिटी का अनुबंध हुआ था। शुरुआत से ही इसे हटाने को लेकर राजनीतिक खींचतान जारी रहा। अनुबंध निरस्तीकरण का मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा, जहां स्मार्ट सिटी और एजेंसी के बीच शिफ्टिंग के लिए अनुबंध हुआ। इसमें सभी सुविधाओं के साथ शिफ्टिंग का खर्च स्मार्ट सिटी को करना था। कहा यह भी जा रहा है कि समझौते के दौरान आमानाका ब्रिज के नीचे अवैध रूप से संचालित गैरेज और झुग्गियों को भी हटाया जाएगा। इसी के चलते एजेंसी यहां चौपाटी शुरू नहीं करा रहा है। जबकि स्मार्ट सिटी का कहना है कि हमने पानी, बिजली, स्ट्रीट लाइट देकर सफाई करवा दी है। अब सब मीटर देकर एजेंसी अपने किराएदारों को दुकान आवंटित करेगा। जरूरी सुविधाएं दे दी गई
^ हमने जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा दी है। शौचालय भी ठीक करा देंगे, लेकिन बाकी का काम एजेंसी को करना है। क्योंकि हमारा अनुबंध एजेंसी से है न कि दुकानदारों से। – विश्वदीप, निगम आयुक्त


