राजमिस्त्री और मजदूरों ने कहा…
बालू की कमी के कारण हजारों मजदूरों के सामने बेरोजगारी की स्थिति आ गई है। दिहाड़ी मजदूरों के लिए दो वक्त की रोटी जुगाड़ करने की चुनौती है। एक तरफ सरकार बेरोजगारी दूर करने की बात कर रही है। वहीं, प्रति माह हजारों मजदूर दूसरे राज्यों में पलायन करने को विवश हैं। झारखंड चैंबर के अध्यक्ष परेश गट्टानी ने कहा कि इस समय प्रति माह 8 से 10 हजार मजदूर पड़ोसी राज्यों में पलायन कर रहे हैं। इधर, मजदूरों का कहना है कि सुबह से दोपहर तक काम की तलाश में रहते हैं, लेकिन काम नहीं मिल पाता है। कई मजदूरों का कहना है कि राज मिस्त्री का 800 रुपए रेट फिक्स है। लेकिन काम नहीं रहने के कारण वे 300 से 400 रुपए में भी काम करने के लिए तैयार हैं। कैसे घर चलेगा, सरकार से अग्रह है कि हमें काम दे: लुदेश्वर गुमला से आए मजदूर लुदेश्वर ने कहा कि हमें पैसों की सख्त जरूरत है। खेती-बारी भी नहीं हो पा रही है। परिवार में लोग बीमार हैं। ऐसे में काम नहीं मिला तो हम क्या करेंगे। सरकार से गुजारिश है कि हमें काम दिया जाए, ताकि परिवार चला सकें। ठेकेदार कम से कम दिहाड़ी देना चाहते हैं : दशरथ मंडल गिरिडीह से रांची मिस्त्री का काम करने आए दशरथ मंडल ने कहा- ऐसा लगता है कि अब राजमिस्त्री का काम खत्म हो गया है। जब बालू की उपलब्धता थी, तब हमें 800 रुपए देकर लोग घर का काम कराने ले जाते थे। अब तो ठेकेदार कम पैसा में काम करवाते हैं। काम नहीं मिलने से सप्ताहभर बैठना पड़ रहा है: मैनेजर यादव मजदूर मैनेजर यादव ने कहा कि बालू समेत अन्य बिल्डिंग मटेरियल नहीं मिल रहे हैं। शायद यही कारण है कि लोग काम ही नहीं करवा रहे हैं। अभी तो स्थिति ऐसी हो गई है कि सप्ताह भर हमें बैठना पड़ रहा है। कुछ लोग काम करवाते हैं। 500 की जगह 300 रु. में काम करने को विवश : रूपेश कूली रूपेश यादव ने बताया कि हम प्रति दिन लालपुर में काम के लिए सुबह सात बजे से ही खड़े रहते हैं। पिछले तीन-चार दिनों से कोई काम नहीं मिला। अब तो कोई 500 की जगह 300 रु. दे, तब भी हम काम करने के लिए तैयार हैं। बालू को लेकर चैंबर ने सीएम को लिखा पत्र प्रदेश में बालू आपूर्ति को सामान्य बनाने के मुद्दे पर झारखंड चैंबर ने मुख्यमंत्री को पत्राचार कर हस्तक्षेप का आग्रह किया है। चैंबर अध्यक्ष परेश गट्टानी और रियल एस्टेट उप समिति चेयरमैन अंचल किंगर ने संयुक्त रूप से कहा कि झारखंड में बालू की अनुपलब्धता और दरों में बेतहाशा वृद्धि से एक तरफ जहां संवेदक व डेवलपर्स के प्रोजेक्ट्स अधूरे रह जा रहे हैं, वहीं निर्माण कार्य में संलग्न श्रमिक बंधुओं की भी आजीविका प्रभावित हो रही है। पड़ोसी राज्य बिहार पर बालू की निर्भरता के कारण लोग बेतहाशा ऊंची दर पर बालू खरीद कर निर्माण कार्य कराने के लिए विवश हैं।


