कचरा व्यवस्था में बिजली गुल:लांगड़ियावास में कचरे से बिजली का प्लांट, वहां ​डंपिंग कम… सेवापुरा में कचरे के पहाड़ बना दिए

राजधानी में ट्रांसफर स्टेशन से डंपिंग यार्ड तक फ्री में पहुंचने वाले कचरे पर निगम अधिकारी ठेकेदार को भुगतान कर रहे हैं। इससे लांगड़ियावास वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में बिजली उत्पादन कम हो रहा है। सोडाला स्थित सुल्तान नगर ट्रांसफर स्टेशन से कचरा लांगड़ियावास और सेवापुरा डंपिंग यार्ड में डंप होता है। निगम ने लांगड़ियावास के लिए ‌~63 प्रति टन, सेवापुरा के लिए ~215 प्रति टन की दर तय की है। लांगड़ियावास में आवश्यकता होने के बावजूद कचरा पूरा नहीं पहुंच पा रहा है। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को नहीं मिल रहा जरूरत का कचरा
लांगड़ियावास में निगम ने जिंदल कंपनी के सहयोग से वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित किया है। रोज 1500 मैट्रिक टन कचरा चा​हिए, जबकि 1000 टन ही मिल रहा है। इससे रोज 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि पर्याप्त मिलने पर उत्पादन 22 मेगावाट तक पहुंच सकता है। फ्री कचरा, फिर भी 63 रुपए प्रति टन भुगतान
सेवापुरा वाला कचरा लांगड़ियावास भेजा जाए तो निगम को ~63 प्रति टन का भुगतान नहीं देना होगा, बल्कि ~65 टन रॉयल्टी मिलेगी। ऐसे में निगम को 2 रुपए प्रति टन राजस्व मिलेगा। सेवापुरा-लांगड़ियावास की समान दूरी 27 किमी है। इसके बावजूद सेवापुरा के लिए 152 रुपए प्रति टन अधिक दर तय की गई है। सालाना 3.30 लाख टन कचरा खपत, 9.5 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन
लांगड़ियावास वेस्ट टू एनर्जी प्लांट प्रदेश का पहला प्लांट है, जो साल में 330 दिन चलता है और 3.30 लाख टन कचरे की खपत है। सालाना 9.5 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन होता है, जो जयपुर डिस्कॉम को सप्लाई की जाती है। “मुझे इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। अगर इस तरह से कचरा भेजा जा रहा है तो यह गलत है, ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी।”
-अपर्णा शर्मा, उपायुक्त, गैराज

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