मिड-डे-मील (पोषाहार) घोटाले में ईडी छापों के दो साल बाद बड़ा अपडेट है। एसीबी के पत्र पर कार्मिक विभाग, शिक्षा विभाग व महिला एवं बाल विकास विभाग ने कोई एक्शन नहीं लिया। इस बीच खुलासा यह है कि सहकारिता विभाग ने मामले में गड़बड़ी मानी है। विभाग की कमेटी ने प्राथमिक जांच में गड़बड़ी मानते हुए विस्तृत जांच की आवश्यकता जताई है। इस आधार पर सहकारिता विभाग ने एसीबी की ओर से मिली 15 अधिकारियों की सूची में से 8 के खिलाफ जांच की मंजूरी (पीसी एक्ट की धारा 17 ए के तहत) दे दी है। हालांकि, पत्र में इन अधिकारियों के नाम नहीं लिखे। वहीं, 3 आईएएस समेत 32 अफसरों के खिलाफ जांच पर सरकार ने चुप्पी साध ली है। दूसरी ओर, विभाग को एसीबी का पत्र मिला है, जिसमें संख्या के साथ अफसरों नाम भी पूछे गए हैं। एसीबी को मिड-डे मील में गड़बड़ी को लेकर इनपुट ईडी से मिला था। 3 सदस्य वाली कमेटी ने माना जांच जरूरी सहकारी समितियों की तत्कालीन रजिस्ट्रार ने 24 अगस्त 2024 को कमेटी गठित की। कमेटी ने एसीबी के पत्र में लगाए आरोप की पड़ताल की। कमेटी ने जांच की मंजूरी की सिफारिश की। मंजूरी पर मुहर के लिए फाइल अप्रैल 2025 में सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक के पास भेजी गई। मंत्री विभाग के निर्णय से सहमत हुए। इसके बाद विभाग ने जून 2025 में एसीबी को पत्र लिख कर बताया कि विभाग के 8 अधिकारियों के खिलाफ जांच की मंजूरी दी जाती है। एसीबी ने पूछे आठ अधिकारियों के नाम एसीबी ने सहकारी विभाग को भेजे पत्र में 15 नाम लिखे थे। इनमें रजिस्ट्रार मुक्तानंद अग्रवाल, कानफैड प्रबंध संचालक वी.के. वर्मा, वित्त अधिकारी चौथमल, सहायक लेखाधिकारी सांवतराम, प्रबंधक (नागरिक आपूर्ति) राजेन्द्र शर्मा, लेखाकार लोकेश कुमार, महाप्रबंधक अनिल कुमार, स. प्रबंधक प्रतिभा सैनी,प्रबंधक राजेन्द्र सिंह,व विनोद कुमार, नेतराम मीणा, योगेन्द्र शर्मा, राजेन्द्र सिंह, गोदाम कीपर रामधन बैरवा, सुपरवाइजर दिनेश शर्मा का नाम है। सहकारी विभाग ने अपने जवाब में नाम लिखने के बजाय संख्या 8 लिखी है। अन्य को लेकर निर्णय कार्मिक विभाग स्तर पर बताया गया है। सरकार का मंथन 18 माह बाद भी पूरा नहीं हुआ : सहकारी विभाग ने जवाब दे दिया, लेकिन सरकार चुप है। 3 आईएएस व लेखा सेवा के अधिकारियों पर कार्मिक विभाग को निर्णय लेना है। शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग से भी कोई जवाब नहीं मिला है।


