कटनी में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर बनाने के विरोध में मंगलवार को ‘कटनी बंद’ सफल रहा। विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक संगठनों और नागरिक मंचों के आह्वान पर शहर के मुख्य बाजारों से लेकर रिहायशी इलाकों तक व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। रविवार सुबह से ही शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों जैसे मिशन चौक, कमानिया गेट, सुभाष चौक और बरही रोड पर बंद का व्यापक असर देखा गया। चाय-पान की गुमटियों से लेकर बड़े शोरूम तक के शटर नहीं खुले। खास बात यह रही कि किसी भी संगठन को जबरन दुकानें बंद कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी; व्यापारियों ने जिले के भविष्य और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। आंदोलन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि पीपीपी मॉडल स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की दिशा में एक कदम है। उनका मानना है कि इससे आम आदमी के लिए इलाज और शिक्षा महंगी हो जाएगी।सामाजिक कार्यकर्ता बिंदेश्वरी पटेल ने कहा, “पूंजीवाद के खिलाफ आज का यह ‘कटनी बंद’ पूरी तरह सफल रहा है। शहर के व्यापारियों और आम नागरिकों ने एकजुट होकर यह साबित कर दिया है कि कटनी को पीपीपी मोड वाला मेडिकल कॉलेज मंजूर नहीं है।” उन्होंने मांग की कि सरकार यहां पूर्णतः सरकारी मेडिकल कॉलेज ही खोले, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को सस्ती शिक्षा और मरीजों को निशुल्क इलाज मिल सके। आंदोलनकारियों का यह भी तर्क है कि पीपीपी मॉडल के तहत कॉलेज बनने से इसका प्रबंधन निजी हाथों में चला जाएगा। इससे भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के शुल्क में भारी बढ़ोतरी की आशंका है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला और पूर्ण सरकारी मेडिकल कॉलेज की घोषणा नहीं की, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण करेगा।


